देवभोग मिल्क पार्लरों पर निगम कार्रवाई से बढ़ा विवाद, संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
रायपुर में देवभोग मिल्क पार्लरों पर नगर निगम की कार्रवाई को लेकर संघ ने कड़ा विरोध जताया है। संघ ने कार्रवाई रोकने और संबंधित कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। रायपुर में देवभोग मिल्क पार्लरों पर नगर पालिक निगम द्वारा की जा रही कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश देवभोग मिल्क पार्लर संघ ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध जताते हुए इसे हजारों लोगों के रोजगार और दुग्ध आपूर्ति पर सीधा प्रभाव डालने वाला कदम बताया है।
सोमवार को संघ के प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम जोन क्रमांक 10 के कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर इस कार्रवाई को तत्काल रोकने की मांग की। साथ ही उन्होंने निगम के एक कर्मचारी पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग की है।
संघ का कहना है कि ‘देवभोग’ छत्तीसगढ़ शासन का एक प्रतिष्ठित ब्रांड है, जो प्रदेश में दुग्ध आपूर्ति की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है। ऐसे में इसे अतिक्रमण की श्रेणी में रखकर हटाने की कार्रवाई न केवल अनुचित है, बल्कि इससे हजारों युवाओं के स्वरोजगार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
ज्ञापन में संघ ने आरोप लगाया है कि जोन क्रमांक 10 के कर्मचारी योगेश यदु ने संघ के प्रदेश अध्यक्ष के साथ अभद्र व्यवहार किया। इस घटना को लेकर संघ में काफी नाराजगी है और उन्होंने संबंधित कर्मचारी से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
इस पूरे मामले में महापौर मीनल चौबे की अनुपस्थिति का भी जिक्र किया गया है। संघ ने महापौर के नाम भी ज्ञापन प्रेषित करते हुए नगर निगम से स्पष्ट ‘व्यवस्थापन नीति’ बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके।
संघ के जिला अध्यक्ष योगेश साहू ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नगर निगम ने अपनी कार्रवाई नहीं रोकी और दोषी कर्मचारी के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पूरे शहर की दुग्ध आपूर्ति भी ठप की जा सकती है, जिससे हालात गंभीर हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देवभोग केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शहरी उपभोक्ताओं के बीच एक सेतु का काम करती है। ऐसे में इसे हटाने के बजाय इसके संचालन के लिए स्पष्ट और व्यवस्थित नीति बनाई जानी चाहिए।
यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में यदि समाधान नहीं निकला, तो यह बड़ा आंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की नजरें नगर निगम प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
कुल मिलाकर, यह विवाद प्रशासन और संघ के बीच समन्वय की कमी को दर्शाता है, जिसे समय रहते सुलझाना आवश्यक है, ताकि शहर की दुग्ध आपूर्ति और रोजगार प्रभावित न हो।