छत्तीसगढ़ में 9 से 23 अप्रैल तक 8वां पोषण पखवाड़ा, कुपोषण के खिलाफ जन-आंदोलन को मिलेगा बल

छत्तीसगढ़ में 9 से 23 अप्रैल तक 8वां पोषण पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से कुपोषण के खिलाफ अभियान को मजबूत करना और बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना है।

Apr 7, 2026 - 19:09
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छत्तीसगढ़ में 9 से 23 अप्रैल तक 8वां पोषण पखवाड़ा, कुपोषण के खिलाफ जन-आंदोलन को मिलेगा बल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर।   छत्तीसगढ़ में कुपोषण के खिलाफ चल रहे प्रयासों को नई गति देने के लिए 9 से 23 अप्रैल तक 8वां पोषण पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा। यह अभियान भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से “कुपोषण मुक्त भारत” के लक्ष्य को सशक्त बनाना है।

इस वर्ष पोषण पखवाड़ा की थीम “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” निर्धारित की गई है। यह थीम बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल के महत्व को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जीवन के पहले छह वर्ष किसी भी बच्चे के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की नींव रखते हैं, इसलिए इस दौरान संतुलित आहार और उचित देखभाल अत्यंत आवश्यक होती है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 से पोषण अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस अभियान के तहत केवल योजनाओं का क्रियान्वयन ही नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी दिशा में पोषण पखवाड़ा को एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इस अभियान के सफल संचालन के लिए 7 अप्रैल को राज्य स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान की रणनीति और कार्ययोजना पर चर्चा की। विभिन्न विभागों को अपने-अपने स्तर पर विस्तृत योजना तैयार कर अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

पोषण पखवाड़ा के दौरान प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में विविध गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें बच्चों और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श, अन्नप्राशन, गोदभराई जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके अलावा स्वच्छता, संतुलित आहार और पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देना भी इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके माध्यम से लोगों को यह बताया जाएगा कि किस प्रकार स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर पोषण स्तर में सुधार किया जा सकता है।

यह अभियान न केवल बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगा, बल्कि समाज में पोषण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना को भी मजबूत करेगा। राज्य सरकार ने इस पहल के माध्यम से कुपोषण दर में कमी लाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार का लक्ष्य निर्धारित किया है।

अंत में, राज्य सरकार ने सभी विभागों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। सामूहिक प्रयासों से ही “सुपोषित छत्तीसगढ़” का सपना साकार किया जा सकता है।