बाल सक्षम नीति के तहत विशेष अभियान तेज, सड़क पर रहने वाले बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास पर फोकस

छत्तीसगढ़ में बाल सक्षम नीति 2022 के तहत 1 जून से 30 जून तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें रेस्क्यू, संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना है।

Jun 17, 2026 - 13:34
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बाल सक्षम नीति के तहत विशेष अभियान तेज, सड़क पर रहने वाले बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास पर फोकस

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में बाल सक्षम नीति 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे बच्चों के संरक्षण, रेस्क्यू और पुनर्वास के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक प्रदेशभर में संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना है।

राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा और उनके समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए इस अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित कर रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, श्रम विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाइयों और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीमें विभिन्न जिलों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

अभियान के दौरान उन बच्चों की पहचान की जा रही है जो सड़क पर रह रहे हैं, भिक्षावृत्ति में संलग्न हैं, बाल श्रम कर रहे हैं अथवा किसी संकटपूर्ण परिस्थिति में जीवनयापन कर रहे हैं। ऐसे बच्चों को तत्काल संरक्षण प्रदान कर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और पुनर्वास कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके।

प्रदेश के कई जिलों में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार, चौक-चौराहे, होटल, ढाबे, कबाड़ी दुकानें, लॉज, पेट्रोल पंप, निर्माण स्थल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान बच्चों की पहचान के साथ-साथ आम नागरिकों को भी बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों और अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

जनजागरूकता कार्यक्रमों के तहत पाम्पलेट वितरण, स्टीकर चस्पा करने और जनसंवाद गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। लोगों को बाल सक्षम नीति 2022 के प्रावधानों, बाल विवाह निषेध कानून, बाल अधिकारों और बाल सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं। अधिकारियों द्वारा नागरिकों से अपील की जा रही है कि यदि कोई बच्चा सड़क पर रहने, भीख मांगने, बाल श्रम करने या किसी असुरक्षित स्थिति में दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभागों को दें।

अभियान के दौरान नागरिकों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और आपातकालीन सेवा 112 के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। बताया जा रहा है कि किसी भी संकटग्रस्त बच्चे की सूचना इन हेल्पलाइन नंबरों पर देकर उसकी मदद सुनिश्चित की जा सकती है।

राज्य सरकार का उद्देश्य केवल बच्चों का रेस्क्यू करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना भी है। इसके लिए पुनर्वास, परामर्श, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों तक पहुंचकर भी टीमों द्वारा अभियान चलाया जा रहा है ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा सहायता से वंचित न रहे।

यह विशेष अभियान बच्चों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों से बाहर निकालकर उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार और संबंधित विभागों की संयुक्त कोशिशों से बाल संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।