अम्बुवाची पर्व के चलते 22 से 26 जून तक बंद रहेंगे मां कामाख्या मंदिर के कपाट
अम्बुवाची पर्व के अवसर पर धोपाप धाम स्थित मां कामाख्या मंदिर के कपाट 22 जून से बंद कर दिए जाएंगे और 26 जून को विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोले जाएंगे। यह पर्व मां भगवती के रजस्वला काल से जुड़ा हुआ माना जाता है और तांत्रिक साधना की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
UNITED NEWS OF ASIA. सुलतानपुर l तीर्थराज धोपाप स्थित मां कामाख्या मंदिर में अम्बुवाची पर्व के अवसर पर 22 जून से मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। चार दिनों तक चलने वाले इस विशेष धार्मिक पर्व के बाद 26 जून को विधि-विधान और विशेष पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के कपाट पुनः खोले जाएंगे।
धोपाप धाम उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जनपद में आदि गंगा गोमती नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक तीर्थस्थल है। मान्यता है कि भगवान राम ने लंका विजय के बाद महर्षि वशिष्ठ के निर्देश पर इसी स्थान पर स्नान कर ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति प्राप्त की थी। यही कारण है कि धोपाप धाम को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है और गंगा दशहरा सहित विभिन्न पर्वों पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन और स्नान के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर परिसर में मां कामाख्या, त्रिपुरा सुंदरी, बरही देवी, सौभाग्य गणपति, राम दरबार और शिव परिवार की प्रतिमाएं स्थापित हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार वर्ष में एक बार अम्बुवाची पर्व के दौरान मां कामाख्या रजस्वला होती हैं। इस अवधि में मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और श्रद्धालुओं का प्रवेश निषिद्ध रहता है।
अम्बुवाची पर्व तांत्रिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान देवी शक्ति का विशेष प्रभाव रहता है और साधना, मंत्र सिद्धि तथा तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना जाता है। देश-विदेश से साधक, तांत्रिक और श्रद्धालु इस पर्व से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने आते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अम्बुवाची पर्व मां भगवती के रजस्वला काल का प्रतीक है। इस दौरान देवी के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और विशेष नियमों का पालन किया जाता है। तीन दिनों की अवधि पूर्ण होने के बाद देवी की विशेष पूजा, श्रृंगार और अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं, जिसके पश्चात मंदिर श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोल दिया जाता है।
धोपाप धाम का महत्व अवध क्षेत्र में विशेष रूप से बताया जाता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार ग्रहण के समय काशी, मकर संक्रांति पर प्रयाग, चैत्र नवमी पर अयोध्या और गंगा दशहरा पर धोपाप में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि यह तीर्थस्थल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार अम्बुवाची पर्व के दौरान 22 से 25 जून तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे तथा 26 जून को विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पुनः खोले जाएंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।