दो साल से ट्राइसाइकिल और स्कूटी के इंतजार में दिव्यांग छात्र, पढ़ाई पर पड़ रहा असर
कोरिया जिले के ग्राम मुरमा के आदिवासी दिव्यांग छात्र जन कुमार सिंह पिछले दो वर्षों से ट्राइसाइकिल और स्कूटी की मांग को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। 12वीं पास कर कंप्यूटर की पढ़ाई कर रहे छात्र को परिवहन सुविधा नहीं मिलने से रोजाना 5 किलोमीटर दूर स्थित सेंटर तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। समाज कल्याण विभाग ने योजना स्थगित होने का हवाला दिया है, जबकि छात्र वैकल्पिक सहायता की मांग कर रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. हेमन्त कुमार, कोरिया l कोरिया जिले में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और दिव्यांग हितग्राहियों तक सुविधाएं पहुंचाने को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जनपद पंचायत बैकुंठपुर के ग्राम मुरमा निवासी आदिवासी दिव्यांग छात्र जन कुमार सिंह पिछले दो वर्षों से ट्राइसाइकिल और स्कूटी जैसी आवश्यक सहायता के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। परिवहन सुविधा के अभाव में उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है, जबकि उन्होंने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अपनी शिक्षा जारी रखने का संकल्प नहीं छोड़ा है।
जन कुमार सिंह पैरों से दिव्यांग हैं, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने 12वीं की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। वर्तमान में वे कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं ताकि भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकें। उनका प्रशिक्षण केंद्र गांव से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित है। चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण उन्हें प्रतिदिन किसी न किसी व्यक्ति की मदद पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार वाहन या सहयोग नहीं मिलने से वे प्रशिक्षण केंद्र तक नहीं पहुंच पाते, जिससे उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है।
दिव्यांग छात्र का कहना है कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में कई बार जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग से ट्राइसाइकिल अथवा पेट्रोल स्कूटी उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सुशासन तिहार के दौरान भी आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस सहायता नहीं मिल सकी। लगातार आवेदन देने के बावजूद केवल आश्वासन मिलने से वे निराश हैं।
मामले में समाज कल्याण विभाग की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि संबंधित योजना अग्रिम आदेश तक स्थगित है, इसलिए स्कूटी उपलब्ध कराना संभव नहीं है। हालांकि छात्र और उनके परिजन यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि स्कूटी योजना फिलहाल बंद है, तो विभाग वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में साधारण ट्राइसाइकिल या इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल उपलब्ध क्यों नहीं करा रहा। उनका मानना है कि इससे छात्र की शिक्षा बिना बाधा जारी रह सकती है।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों को समय पर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे मामलों में त्वरित सहायता मिलनी चाहिए ताकि किसी छात्र का भविष्य केवल संसाधनों की कमी के कारण प्रभावित न हो।
समाज कल्याण विभाग के उप संचालक बी. तिर्की ने विभागीय प्रक्रिया और योजना की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा है। वहीं जन कुमार सिंह को अब भी उम्मीद है कि प्रशासन उनकी स्थिति को गंभीरता से समझेगा और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगा।
यह मामला केवल एक दिव्यांग छात्र की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता को भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और जन कुमार सिंह को उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए कब तक आवश्यक सहायता मिल पाती है।