दुर्ग में बाइक चोरी गिरोह का खुलासा, लेकिन श्रेय की लड़ाई ने खड़े किए सवाल

दुर्ग में पुलिस ने बाइक चोरी गिरोह का खुलासा कर 6 वाहन बरामद किए हैं, लेकिन कार्रवाई के श्रेय को लेकर सुपेला और धमधा पुलिस के बीच विवाद सामने आया है। साथ ही एक आरोपी को छोड़ने के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

Apr 26, 2026 - 16:39
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दुर्ग में बाइक चोरी गिरोह का खुलासा, लेकिन श्रेय की लड़ाई ने खड़े किए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. हेमंत पाल, दुर्ग l छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में दोपहिया वाहन चोरी गिरोह के खुलासे के साथ एक नया विवाद भी सामने आ गया है। जहां एक ओर पुलिस इस कार्रवाई को बड़ी सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं दूसरी ओर श्रेय की लड़ाई और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

थाना सुपेला पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि उसने सार्वजनिक स्थानों से बाइक चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई में चार आरोपियों और एक विधि से संघर्षरत बालक को पकड़ा गया है। आरोपियों की निशानदेही पर 5 स्प्लेंडर मोटरसाइकिल और 1 एक्टिवा सहित कुल 6 चोरी के वाहन बरामद किए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि ये चोरी की घटनाएं नेहरू नगर अटल प्रतिमा, लक्ष्मी नगर सुपेला और भिलाई नगर रेलवे स्टेशन क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। गिरफ्तार आरोपियों में हर्ष साहू, गजानंद यादव, देवेंद्र यादव और अजय पटेल के नाम शामिल हैं।

हालांकि, इस पूरे मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब सूत्रों ने दावा किया कि वास्तविक कार्रवाई धमधा थाना पुलिस द्वारा की गई थी। जानकारी के अनुसार संदिग्धों को पहले धमधा क्षेत्र में हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जहां से चोरी के वाहनों की बरामदगी भी हुई। बाद में पूरा मामला सुपेला थाना को सौंप दिया गया।

सूत्रों के अनुसार बरामद वाहनों को पहले धमधा थाना में रखा गया और फिर एक छोटे मालवाहक वाहन के माध्यम से सुपेला थाना भेजा गया। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि इस कार्रवाई का असली श्रेय किसे मिलना चाहिए—धमधा पुलिस को या सुपेला पुलिस को।

मामले को और गंभीर बनाते हुए यह आरोप भी सामने आया है कि एक आरोपी को कथित लेन-देन के बाद छोड़ दिया गया। इस आरोप में धमधा थाना के एक सब-इंस्पेक्टर और एसडीओपी कार्यालय से जुड़े एक वाहन चालक का नाम चर्चा में है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब जिले के एसएसपी विजय अग्रवाल अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।

वहीं, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्र ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

एक तरफ पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर उसी कार्रवाई की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला अब केवल चोरी के खुलासे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस विभाग के अंदरूनी समन्वय और जवाबदेही की भी परीक्षा बन गया है।

अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि यह वास्तव में पुलिस की सफलता है या फिर श्रेय की जंग में सच्चाई कहीं दबकर रह गई है।