यह प्रदर्शन मुख्य रूप से देवरी विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए क्षेत्र की जमीनी समस्याओं को गंभीरता से उठाया और शीघ्र समाधान की मांग की।
धरने के दौरान किसानों और आम नागरिकों ने गेहूं खरीदी में हो रही भारी देरी पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि पंजीकृत किसानों का पूरा गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही किसानों पर लगाए जा रहे 14 प्रतिशत ब्याज को तत्काल बंद करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने सैटेलाइट सर्वे में गड़बड़ी, फसल बीमा में हो रहे कथित शोषण और उपार्जन केंद्रों पर तुलाई की सीमित क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इन समस्याओं के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें समय पर उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इसके अलावा पेयजल की गंभीर समस्या भी धरने का प्रमुख मुद्दा रही। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी को लेकर लोगों ने प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की। साथ ही जल जीवन मिशन के तहत हो रहे कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई।
बिजली व्यवस्था को लेकर भी लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली। किसानों ने मांग की कि उन्हें 5 हॉर्सपावर तक निशुल्क और निर्बाध बिजली दी जाए, साथ ही अघोषित बिजली कटौती पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए। उनका कहना था कि बार-बार होने वाली बिजली कटौती से खेती और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
धरना प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो किसानों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन, भूख हड़ताल और व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसानों के अधिकारों, आम जनता की बुनियादी सुविधाओं और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए है, जिसे हर हाल में जारी रखा जाएगा।
इस प्रदर्शन ने प्रशासन का ध्यान क्षेत्र की जमीनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी और सरकार इन मांगों पर कितना गंभीरता से विचार करते हैं और कब तक ठोस कदम उठाते हैं। फिलहाल, केसली में यह आंदोलन किसानों और आम जनता की आवाज को बुलंद करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बनकर सामने आया है।