धवलपुरडीह में जमीन सीमांकन पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की

गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के धवलपुरडीह गांव में जमीन सीमांकन को लेकर विवाद सामने आया है। दिव्यांग ग्रामीण टंकेश चक्रधारी ने पुश्तैनी जमीन को दूसरे के नाम पर दर्शाए जाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष जांच और दोबारा सीमांकन की मांग की है।

Jun 17, 2026 - 14:28
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धवलपुरडीह में जमीन सीमांकन पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड स्थित धवलपुरडीह गांव में जमीन सीमांकन को लेकर एक विवाद सामने आया है, जिसने ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। गांव के लोगों का आरोप है कि सीमांकन प्रक्रिया के दौरान राजस्व अभिलेखों और नक्शों में ऐसी विसंगतियां सामने आ रही हैं, जिनसे वर्षों से कब्जे में रही जमीन की स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले के केंद्र में दिव्यांग ग्रामीण टंकेश चक्रधारी हैं, जिन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को सीमांकन के दौरान किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्शाया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस भूमि पर उनका परिवार लंबे समय से कब्जे में है, उसके संबंध में वर्तमान रिकॉर्ड और सीमांकन प्रक्रिया में अंतर दिखाई दे रहा है। इससे उन्हें अपनी जमीन के स्वामित्व को लेकर चिंता सताने लगी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने राजस्व नक्शे और अभिलेख आसानी से उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थानीय स्तर पर भ्रम और विवाद की स्थिति बन रही है। उनका कहना है कि यदि पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध कराकर उनकी तुलना वर्तमान अभिलेखों से की जाए, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पटवारी, राजस्व निरीक्षक और तहसील कार्यालय के स्तर पर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।

हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित राजस्व अधिकारियों की ओर से इस विषय पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक माना जा रहा है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

ग्रामीणों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में छोटी सी त्रुटि भी भविष्य में बड़े विवाद का कारण बन सकती है। इसलिए सीमांकन और रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप की जानी चाहिए। उनका मानना है कि पुराने राजस्व अभिलेखों, नक्शों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर दोबारा सीमांकन कराया जाए, जिससे किसी भी प्रकार की शंका या विवाद की स्थिति समाप्त हो सके।

धवलपुरडीह के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के दौरान सभी संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जाए और प्रभावित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में भूमि अभिलेखों और नक्शों को डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू है, जिसका उद्देश्य भूमि संबंधी विवादों को कम करना और रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाना है। इसके बावजूद यदि किसी क्षेत्र में रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर सामने आता है, तो उसकी जांच और समाधान प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर ग्रामीणों, प्रशासन और संबंधित पक्षों की नजर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या है और इसका समाधान किस प्रकार किया जाएगा।