भांठागांव बी में 40 साल बाद निकली 'अन्य कुवांरी', देव शुद्धिकरण अनुष्ठान में उमड़ी आस्था

बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम भांठागांव बी में तीन दिवसीय देव शुद्धिकरण एवं पूजा अनुष्ठान श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। उड़ीसा से पहुंचे वासुदेव महाराज के नेतृत्व में संपन्न हुए इस धार्मिक आयोजन के दौरान करीब 40 वर्षों बाद 'अन्य कुवांरी' निकलने से ग्रामीणों में उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिला।

Jun 26, 2026 - 10:25
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भांठागांव बी में 40 साल बाद निकली 'अन्य कुवांरी', देव शुद्धिकरण अनुष्ठान में उमड़ी आस्था

UNITED NEWS OF ASIA. लीलाधर साहू, गुण्डरदेही l बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड स्थित ग्राम भांठागांव बी में तीन दिवसीय देव शुद्धिकरण एवं पूजा-अनुष्ठान श्रद्धा, आस्था और धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष आयोजन में उड़ीसा से प्रसिद्ध सिरहा वासुदेव महाराज पहुंचे, जिनके नेतृत्व में वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का विधिवत निर्वहन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान गांव में भक्तिमय वातावरण बना रहा और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अनुष्ठान में भाग लिया।

ग्रामीणों के लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों के बाद 22 जून की शाम करीब 5:30 बजे वासुदेव महाराज ग्राम भांठागांव बी पहुंचे। गांव की सीमा पर पटाखों, फूल-मालाओं और जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें पैदल शीतला मंदिर तक लेकर पहुंचे, जहां विधिवत पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई।

धार्मिक परंपरा के अनुसार तीन दिनों तक गांव में सभी प्रकार के सामान्य कार्य बंद रखे गए। इस दौरान शराब, मांस और अन्य नशे से संबंधित गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया। ग्रामीणों ने अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए पूरे अनुष्ठान को सफल बनाया।

अनुष्ठान के दूसरे चरण में दोपहर करीब 2 बजे वासुदेव महाराज ने बिरेतरा तालाब की मेड़ पर विशेष पूजा के बाद खुदाई कर 'बट लोही' निकाली। उसे लाल कपड़े में बांधकर शीतला मंदिर परिसर में स्थापित किया गया, जहां लगातार तीन दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे।

चौथे दिन शाम लगभग 4 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति में शीतला मंदिर परिसर में बटलोही खोली गई। इसके भीतर से मिट्टी में लिपटी चार सफेद गोल और तीन काली 'अन्य कुवांरी' निकलीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हें जल से शुद्ध कर दूध में रखा गया। इस दुर्लभ धार्मिक दृश्य को देखने के लिए आसपास के कई गांवों से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंचे।

वासुदेव महाराज ने बताया कि जिस गांव में अन्य कुवांरी निकलती है, वहां धन-धान्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली का वास माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे गांव में समृद्धि बनी रहती है और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

सरपंच दोषण साहू ने बताया कि पिछले 40 से 45 वर्षों से ग्रामीण केवल इस परंपरा के बारे में सुनते आ रहे थे, लेकिन इस बार अनुष्ठान की सफलता के साथ अन्य कुवांरी निकलने से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का मानना है कि इससे वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा और गांव में सुख-शांति एवं समृद्धि का वातावरण बनेगा।

इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में ग्राम पंचायत, ग्रामीण समिति तथा समस्त ग्रामवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति ने सभी सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। आयोजन में सरपंच दोषण साहू, उपसरपंच यशोदा निषाद, ग्रामीण अध्यक्ष पुरुषोत्तम साहू, प्रीतम ठाकुर, लीकेश साहू और खेदुराम साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।