भोरमदेव अभ्यारण्य में चराई प्रतिबंध पर जागरूकता अभियान, वन्यजीव संरक्षण के लिए ग्रामीणों ने दिया सहयोग का भरोसा

कबीरधाम के भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के उद्देश्य से ग्राम बेंदरची में जागरूकता बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीणों और चरवाहों को अभ्यारण्य क्षेत्र में पालतू मवेशियों की चराई पर लगे प्रतिबंध की जानकारी दी गई। ग्रामीणों ने वन विभाग के संरक्षण अभियान में सहयोग करने और चराई नहीं कराने का संकल्प लिया।

Jun 25, 2026 - 18:12
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भोरमदेव अभ्यारण्य में चराई प्रतिबंध पर जागरूकता अभियान, वन्यजीव संरक्षण के लिए ग्रामीणों ने दिया सहयोग का भरोसा

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा l कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के संवर्धन को लेकर वन विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में ग्राम बेंदरची में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और चरवाहों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य अभ्यारण्य क्षेत्र में पालतू मवेशियों की चराई पर लगाए गए प्रतिबंध के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा वन एवं वन्यजीव संरक्षण में जनसहभागिता सुनिश्चित करना था।

वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल के निर्देश पर आयोजित इस बैठक में भोरमदेव अभ्यारण्य की अधीक्षक अनीता साहू ने ग्रामीणों को अभ्यारण्य क्षेत्र में चराई प्रतिबंध के कारणों और इसके महत्व की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभ्यारण्य क्षेत्र में अनियंत्रित चराई से प्राकृतिक वनस्पतियों का लगातार क्षरण होता है, जिससे जंगलों के प्राकृतिक पुनर्जनन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके अलावा वन्यजीवों के लिए आवश्यक भोजन और सुरक्षित आवास भी प्रभावित होते हैं।

बैठक में यह भी बताया गया कि पालतू पशुओं के माध्यम से कई संक्रामक रोग वन्यजीवों तक पहुंच सकते हैं, जिससे वन्यजीवों के स्वास्थ्य और संरक्षण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण अभ्यारण्य क्षेत्र में पालतू मवेशियों की चराई पूरी तरह प्रतिबंधित की गई है और इसका पालन सभी नागरिकों के लिए आवश्यक है।

वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को जिले की महत्वाकांक्षी भोरमदेव जंगल सफारी परियोजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत वन्यजीवों के आवास प्रबंधन, चरागाह विकास, प्राकृतिक घासभूमियों के संरक्षण तथा आवास सुधार से जुड़े कई कार्य किए जा रहे हैं। यदि अभ्यारण्य क्षेत्र में चराई पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाएगा, तो प्राकृतिक घासभूमियों का विकास होगा और शाकाहारी वन्यजीवों को पर्याप्त भोजन एवं सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। इससे वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि होने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण और ईको-पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

बैठक के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए वन एवं वन्यजीव संरक्षण में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने सहमति जताई कि वे अभ्यारण्य क्षेत्र में पालतू मवेशियों की चराई नहीं कराएंगे और अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे। वन विभाग ने भी लोगों से अपील की कि वे वन संरक्षण संबंधी नियमों का पालन करें और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

बैठक में सरपंच सुखदास पटेल, उपवनक्षेत्रपाल जयकुमार खांडे, मीना धुर्वे, वनरक्षक ऋतु कुमारी बोगल, अहिल्या ठाकुर, हेमराम कपालवे, विनोद कुमार भारद्वाज, रूपेश डोंगरे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और चरवाहे उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में वन विभाग ने स्पष्ट किया कि जनसहयोग के बिना वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है। इसलिए ऐसे जागरूकता अभियान आगे भी लगातार चलाए जाते रहेंगे, ताकि भोरमदेव अभ्यारण्य की प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता को सुरक्षित रखा जा सके।