पूर्व कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, जांच की मांग तेज

बलरामपुर के तत्कालीन कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं, अवैध वसूली और राजस्व मामलों में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोमनाथ भगत की शिकायत पर केंद्रीय सतर्कता आयोग ने मामले को जांच के लिए राज्य शासन को भेजा है।

Jun 17, 2026 - 11:45
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पूर्व कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, जांच की मांग तेज

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर जिले के तत्कालीन कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों के गंभीर आरोपों को लेकर नया विवाद सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोमनाथ भगत द्वारा की गई शिकायत के आधार पर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के लिए छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन कलेक्टर के कार्यकाल के दौरान विभिन्न मामलों में वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ अन्याय और शोषण से जुड़े मामलों में उचित कार्रवाई नहीं की गई तथा कुछ मामलों में अवैध वसूली और प्रशासनिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए गए हैं।

शिकायत में राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में कथित गड़बड़ियों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि सरकारी भूमि से संबंधित प्रकरणों में नियमों की अनदेखी की गई और कुछ मामलों में पक्षपातपूर्ण निर्णय लिए गए। इसके अलावा क्षेत्र में कथित अवैध खनन गतिविधियों के कारण शासन को आर्थिक नुकसान होने की बात भी शिकायत में कही गई है।

सोमनाथ भगत ने अपनी शिकायत के साथ विभिन्न दस्तावेज और तथ्यों को संलग्न करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत की प्रतियां प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री को भी भेजी गई हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच आवश्यक है ताकि आरोपों की सत्यता सामने आ सके और यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई हो तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा शिकायत को राज्य शासन के मुख्य सचिव के पास भेजे जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि, अब तक आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही जांच में किसी निष्कर्ष की घोषणा की गई है। ऐसे में मामले को फिलहाल आरोपों और शिकायत के स्तर पर ही देखा जा रहा है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, ताकि तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सके। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

फिलहाल यह मामला बलरामपुर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। शासन स्तर पर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही इस पूरे प्रकरण में स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अधिकारियों की ओर से मामले में अभी कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।