बेमेतरा में ड्रोन तकनीक से खेती को मिली नई उड़ान, सात मिनट में एक एकड़ में हुआ उर्वरक छिड़काव

सहकारी सप्ताह के तहत बेमेतरा में किसानों को ड्रोन तकनीक से उर्वरक छिड़काव का प्रदर्शन कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन के माध्यम से मात्र सात मिनट में एक एकड़ खेत में उर्वरक का समान रूप से छिड़काव किया जा सकता है, जिससे समय, श्रम और लागत में कमी आती है।

Jul 2, 2026 - 13:45
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बेमेतरा में ड्रोन तकनीक से खेती को मिली नई उड़ान, सात मिनट में एक एकड़ में हुआ उर्वरक छिड़काव

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सहकारी सप्ताह के तृतीय दिवस पर बेमेतरा जिले में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से ड्रोन के माध्यम से उर्वरक छिड़काव का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य खेती को अधिक लाभकारी, सुरक्षित और कम लागत वाली बनाना तथा किसानों को नई तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान खेत में ड्रोन के माध्यम से उर्वरक छिड़काव का लाइव प्रदर्शन किया गया। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि पारंपरिक तरीकों की तुलना में ड्रोन तकनीक अधिक तेज, सटीक और प्रभावी है। ड्रोन के जरिए उर्वरक का समान रूप से छिड़काव होता है, जिससे उर्वरक की बर्बादी कम होती है और फसलों को आवश्यक पोषण संतुलित मात्रा में प्राप्त होता है। इससे उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ समय और श्रम की भी उल्लेखनीय बचत होती है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ड्रोन तकनीक केवल उर्वरक छिड़काव तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से फसलों की निगरानी, रोगों की पहचान तथा कीटनाशकों का सुरक्षित छिड़काव भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। ड्रोन के उपयोग से किसानों का रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के सीधे संपर्क में आने का खतरा भी कम हो जाता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम घटते हैं।

कार्यक्रम में शामिल कृषक सदस्य विजय पटेल और कमल पटेल ने बताया कि वे पिछले पांच वर्षों से आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर सब्जी, फूल और अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि सहकारिता, कृषि और उद्यानिकी विभाग के सहयोग से उन्हें आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि ड्रोन की मदद से मात्र सात मिनट में एक एकड़ खेत में उर्वरक का छिड़काव पूरा हो जाता है, जबकि पारंपरिक विधि में काफी अधिक समय और श्रम लगता है। इससे खेती अधिक लाभदायक और सुविधाजनक बन रही है।

कार्यक्रम में सहकारिता विभाग, कृषि विभाग तथा संबंधित संस्थाओं के अधिकारियों ने किसानों को ड्रोन तकनीक के उपयोग, उसके लाभ और भविष्य की संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी। किसानों ने भी इस नई तकनीक में रुचि दिखाई और इसे कृषि क्षेत्र में उपयोगी नवाचार बताया।

इस अवसर पर सहायक पंजीयक ए. के. सिंह, वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक विनय कुमार जेहोआश, महेंद्र कुमार टेकाम, सहकारिता विस्तार अधिकारी संदीप वर्मा, सहकारी निरीक्षक पल्लवी मेश्राम, रूपिका यादव, कृषि विभाग के आरईओ राजेश वर्मा, मार्केटिंग प्रबंधक संजय ठाकुर, समिति प्रबंधक उत्तरा टंडन, विनोद कुमार साहू, हरीश कुमार साहू, ड्रोन ऑपरेटर लोकेश साहू, पूरन निर्मलकर, मंशा साहू, हरीश वर्मा, प्रिंस राजपूत सहित बड़ी संख्या में किसान और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

सहकारिता विभाग की इस पहल को जिले में आधुनिक, वैज्ञानिक और तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन मिल रहा है।