सुशासन तिहार में 507 आवेदनों का शत-प्रतिशत निराकरण, पशुपालन से ग्रामीणों को मिला स्वरोजगार का नया अवसर

अंबिकापुर जिले में सुशासन तिहार के दौरान पशुधन विकास विभाग को प्राप्त 507 आवेदनों का शत-प्रतिशत निराकरण किया गया। बकरी, सूकर, मुर्गी और गाय पालन से जुड़े हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ देने के साथ आधुनिक पशुपालन की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई, जिससे ग्रामीणों को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की नई दिशा मिली।

Jun 28, 2026 - 11:48
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सुशासन तिहार में 507 आवेदनों का शत-प्रतिशत निराकरण, पशुपालन से ग्रामीणों को मिला स्वरोजगार का नया अवसर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l अंबिकापुर जिले में आयोजित सुशासन तिहार ग्रामीणों के लिए केवल शिकायतों के समाधान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पशुपालन आधारित स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी अभियान बनकर उभरा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग ने ग्रामीणों की मांगों का समयबद्ध निराकरण करते हुए पशुपालन को आजीविका का मजबूत माध्यम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।

सुशासन तिहार के दौरान जिलेभर से पशुपालन से संबंधित कुल 507 आवेदन प्राप्त हुए। जिला प्रशासन ने इन सभी आवेदनों का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित कर यह संदेश दिया कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्राप्त आवेदनों में बकरी पालन, सूकर पालन, मुर्गी पालन, गाय पालन तथा अन्य पशुधन आधारित गतिविधियों से जुड़े आवेदन शामिल थे। सभी आवेदनों का निर्धारित समय में निराकरण कर पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की गई।

जनपद पंचायतवार आंकड़ों के अनुसार लखनपुर से सर्वाधिक 96 आवेदन प्राप्त हुए। इसके अलावा मैनपाट से 84, सीतापुर से 81, बतौली से 70, अंबिकापुर से 67, उदयपुर से 66 तथा लुंड्रा से 43 आवेदन प्राप्त हुए। सभी जनपदों में प्रत्येक आवेदन का शत-प्रतिशत निराकरण कर प्रशासन ने प्रभावी कार्यप्रणाली का उदाहरण प्रस्तुत किया।

पशुधन विकास विभाग ने केवल योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने तक ही अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि हितग्राहियों को आधुनिक पशुपालन की तकनीकों से भी अवगत कराया। विभाग द्वारा पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार, वैज्ञानिक पालन-पोषण तथा उत्पादन बढ़ाने के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी जा रही है, जिससे पशुपालक दीर्घकालीन रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

विभाग का उद्देश्य ग्रामीणों को केवल अनुदान या योजना का लाभ देना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी के रूप में विकसित करना है। इसी सोच के तहत प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सतत सहयोग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि पशुपालन ग्रामीणों के लिए स्थायी आय का स्रोत बन सके।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए शासन इस क्षेत्र को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। बकरी, सूकर, मुर्गी और डेयरी आधारित गतिविधियां ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध करा रही हैं। इससे युवाओं और महिलाओं को भी स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

सुशासन तिहार के माध्यम से 507 आवेदनों का शत-प्रतिशत निराकरण इस बात का उदाहरण है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और समयबद्ध कार्यप्रणाली से ग्रामीण विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जा सकता है। यह पहल न केवल ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दे रही है, बल्कि आत्मनिर्भर गांव और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान कर रही है।