स्कूलों में मंत्रोच्चार पर कांग्रेस का सवाल, सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार को लेकर राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार बताए कि क्या मंत्रोच्चार संबंधी कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। पार्टी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 से जोड़ते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता का मुद्दा उठाया है।

Jul 3, 2026 - 15:56
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स्कूलों में मंत्रोच्चार पर कांग्रेस का सवाल, सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार को लेकर राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद सरकार को यह साफ करना चाहिए कि क्या स्कूलों में मंत्रोच्चार और विभिन्न धार्मिक मंत्रों के पाठ को अनिवार्य करने संबंधी कोई आधिकारिक आदेश वास्तव में जारी किया गया है या नहीं।

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने अवलोकन में यह कहा है कि सरकार द्वारा स्कूलों में मंत्रोच्चार को अनिवार्य करने संबंधी किसी ठोस आदेश का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि मीडिया में प्रसारित हो रहे आदेश वास्तविक हैं या केवल भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। उनका कहना है कि यदि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है तो सरकार इस विषय पर सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सरकारी स्कूलों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा के स्वरूप में बदलने का प्रयास कर रही है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि स्कूलों में सुबह दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, मध्यान्ह भोजन मंत्र तथा छुट्टी के समय गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का वाचन कराए जाने की व्यवस्था संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।

सुशील आनंद शुक्ला ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28(1) का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्णतः राज्य निधि से संचालित शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष धर्म की धार्मिक शिक्षा या प्रार्थना आयोजित नहीं की जा सकती। वहीं अनुच्छेद 28(3) के अनुसार राज्य से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में किसी भी छात्र को उसकी अथवा उसके अभिभावकों की सहमति के बिना किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस का कहना है कि सरकारी और अर्ध-सरकारी विद्यालयों में विभिन्न धर्मों और समुदायों के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। ऐसे में किसी एक धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों का अनिवार्य वाचन धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर प्रभाव डाल सकता है। पार्टी ने यह भी तर्क दिया कि यदि एक धर्म विशेष की प्रार्थनाओं को अनिवार्य किया जाता है तो अन्य धर्मों के अनुयायी भी अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार प्रार्थना या धार्मिक पाठ की मांग कर सकते हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

प्रेस विज्ञप्ति में कांग्रेस ने सरकार से शिक्षा को धार्मिक स्वरूप देने के बजाय वैज्ञानिक सोच, आधुनिक शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक संस्कारों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि बच्चों में सदाचार और संस्कार विकसित करना आवश्यक है, लेकिन किसी भी धार्मिक परंपरा को अनिवार्य रूप से थोपना उचित नहीं माना जा सकता। कांग्रेस ने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट नीति और आधिकारिक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।