मनरेगा के काम जुलाई से शुरू करे सरकार, 60:40 फंडिंग मॉडल पर कांग्रेस का विरोध

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार से जुलाई माह से ही मनरेगा के कार्य शुरू करने की मांग की है। कांग्रेस ने मनरेगा में केंद्र-राज्य की 60:40 फंडिंग व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बताया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने राज्य के हितों की अनदेखी करते हुए केंद्र के फैसले का विरोध नहीं किया।

Jul 3, 2026 - 16:00
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मनरेगा के काम जुलाई से शुरू करे सरकार, 60:40 फंडिंग मॉडल पर कांग्रेस का विरोध

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार से मांग की है कि मनरेगा के कार्य जुलाई माह से ही प्रारंभ किए जाएं, ताकि बारिश के मौसम में भी ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मिल सके। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मनरेगा के नए स्वरूप "जी राम जी" के तहत केंद्र और राज्य के बीच 60:40 की वित्तीय भागीदारी को मंजूरी देना राज्य के हितों के खिलाफ निर्णय है।

दीपक बैज ने कहा कि राज्य सरकार को मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तराखंड की तरह इस व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि अन्य राज्यों ने खेती के मौसम में मनरेगा कार्य बंद करने और वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर केंद्र के सामने अपनी बात रखी, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के हितों की रक्षा करने में विफल रही। उन्होंने कहा कि सरकार ने केंद्र के निर्णय का विरोध करने के बजाय उसे स्वीकार कर लिया।

कांग्रेस का कहना है कि राज्य के वित्तीय संसाधन पहले से सीमित हैं। जीएसटी व्यवस्था के कारण अधिकांश कर राजस्व केंद्र के पास जाता है, ऐसे में मनरेगा के खर्च का 40 प्रतिशत भार राज्य पर डालने से अन्य विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पिछले ढाई वर्षों में वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देकर नई योजनाएं शुरू नहीं कर सकी है और अब मनरेगा में अतिरिक्त वित्तीय दायित्व से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाएगी।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अभी तक मनरेगा पूरी तरह केंद्र प्रवर्तित योजना के रूप में संचालित होती थी, लेकिन अब राज्य सरकार को 40 प्रतिशत राशि वहन करनी होगी। कांग्रेस ने इसे राज्य की जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को या तो पूरी लागत उठानी चाहिए थी अथवा राज्यों को विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए थी।

दीपक बैज ने यह भी दावा किया कि सरकार ने मनरेगा के लिए चार हजार करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया है, जबकि पहले इस योजना पर लगभग छह हजार दो सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे। उनका कहना है कि यदि बजट में कमी की गई है तो घोषित रूप से रोजगार के दिनों में वृद्धि का दावा व्यवहारिक रूप से कैसे पूरा होगा। कांग्रेस ने आशंका जताई कि सीमित बजट के कारण मनरेगा कार्यों में कटौती हो सकती है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि "जी राम जी" कानून को लागू हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन समय पर निर्णय नहीं लिए जाने के कारण मनरेगा के कार्य प्रभावित हुए हैं। पार्टी का कहना है कि सामान्यतः 15 जून के बाद मनरेगा के कार्य बंद हो जाते हैं और यदि अब निर्णय लेने में देरी होगी तो ग्रामीण मजदूरों को कई महीनों तक रोजगार नहीं मिल पाएगा। कांग्रेस ने सरकार से जुलाई माह से ही मनरेगा कार्य शुरू कर ग्रामीण परिवारों को नियमित रोजगार उपलब्ध कराने और राज्य के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है।