नक्सलियों के साथ तिरंगा यात्रा निकालने वाली भाजपा सरकार निर्दोष आदिवासियों की रिहाई पर मौन क्यों? : कांग्रेस

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा सरकार पर नक्सलवाद और निर्दोष आदिवासियों के मामलों में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार से 15 अगस्त से पहले जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों के मामलों की समीक्षा करने, कथित झूठे मुकदमे वापस लेने और बेगुनाहों को रिहा करने की मांग की है। कांग्रेस ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर भी सरकार से सवाल किए हैं।

Aug 12, 2026 - 16:14
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नक्सलियों के साथ तिरंगा यात्रा निकालने वाली भाजपा सरकार निर्दोष आदिवासियों की रिहाई पर मौन क्यों? : कांग्रेस

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा सरकार पर नक्सलवाद के मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों के साथ 15 अगस्त को तिरंगा यात्रा निकालकर स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रही है, जबकि कांग्रेस के अनुसार बड़ी संख्या में निर्दोष आदिवासी अब भी जेलों में बंद हैं। कांग्रेस ने सरकार से 15 अगस्त से पहले जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों के मामलों की समीक्षा कर उन्हें न्याय देने की मांग की है।

धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार लगातार दावा कर रही है कि प्रदेश में नक्सलवाद खत्म हो रहा है और नक्सली आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास के लिए सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं और उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ दिए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में कांग्रेस का सवाल है कि यदि नक्सलवाद समाप्ति की ओर है तो नक्सली बताकर या नक्सलियों का सहयोगी बताकर जेल में बंद आदिवासियों के मामलों की निष्पक्ष समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है।

मामलों की समीक्षा की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जिन आदिवासियों के खिलाफ नक्सल गतिविधियों से जुड़े मामले दर्ज किए गए हैं, उनमें कई लोग खुद को निर्दोष बताते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि कुछ आदिवासी कथित मामलों और भय के कारण अपने घर-गांव छोड़कर दूसरे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं।

धनंजय सिंह ठाकुर ने सरकार से सवाल किया कि यदि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की नीति के तहत उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सकता है, तो निर्दोष आदिवासियों को न्याय और रिहाई क्यों नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को तिरंगा यात्रा के आयोजन के बीच सरकार को यह भी बताना चाहिए कि जेल में बंद उन आदिवासियों के अधिकारों और स्वतंत्रता को लेकर उसकी क्या नीति है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सली हिंसा का दंश झेला है। हिंसा के कारण अनेक परिवार प्रभावित हुए और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा विकास जैसी गतिविधियों पर भी असर पड़ा। ऐसे में सरकार को नक्सलवाद से जुड़े मामलों में स्पष्ट और पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए।

कांग्रेस ने मांग की है कि 15 अगस्त से पहले जेल में बंद आदिवासियों के मामलों की तत्काल समीक्षा की जाए। यदि जांच में कोई व्यक्ति निर्दोष पाया जाता है तो उसके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेकर उसे रिहा किया जाए। धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार को तिरंगा यात्रा के साथ-साथ निर्दोष आदिवासियों की आजादी और न्याय के सवाल का भी जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में न्याय, पारदर्शिता और विश्वास बहाली के लिए सभी मामलों की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है। पार्टी ने सरकार से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग की है।