स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से पहाड़ी कोरवा महिला ने तीन स्वस्थ नवजात शिशुओं को दिया जन्म

बलरामपुर जिले के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की त्वरित पहल से अति-जोखिम वाली गर्भवती पहाड़ी कोरवा महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्यकर्मियों, मितानिन, 102 एंबुलेंस टीम और चिकित्सकों के समन्वय से महिला ने तीन स्वस्थ नवजात शिशुओं को जन्म दिया। मां और तीनों बच्चे स्वस्थ हैं तथा चिकित्सकों की निगरानी में हैं।

Sep 7, 2026 - 17:30
Sep 7, 2026 - 17:49
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स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से पहाड़ी कोरवा महिला ने तीन स्वस्थ नवजात शिशुओं को दिया जन्म

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l जिले के दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जरूरतमंद मरीजों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। राजपुर विकासखंड की अति-जोखिम वाली गर्भवती पहाड़ी कोरवा महिला बसंती को समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिसके बाद उसने तीन स्वस्थ नवजात शिशुओं को जन्म दिया। वर्तमान में मां और तीनों बच्चे स्वस्थ हैं तथा चिकित्सकों की निगरानी में हैं।

जानकारी के अनुसार, गर्भवती महिला किसी कारणवश जिला अस्पताल अंबिकापुर से बिना उपचार कराए अपने गांव वापस लौट आई थी। महिला के संबंध में जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला सक्रिय हुआ और उसे आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तत्काल तैयारियां शुरू की गईं। विभाग द्वारा महिला की स्थिति को देखते हुए उसे समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग के मैदानी कर्मचारियों, मितानिन, 102 एंबुलेंस टीम और अस्पताल के चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय से महिला को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा मिल सकी। समय पर चिकित्सकीय देखभाल मिलने के बाद महिला ने तीन बच्चों को जन्म दिया। चिकित्सकों की निगरानी में मां और तीनों नवजात शिशुओं की स्थिति फिलहाल सामान्य और स्वस्थ बताई गई है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने बताया कि अति-जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल रेफरल की व्यवस्था सुरक्षित मातृत्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में रहने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले, मितानिन, 102 एंबुलेंस टीम और चिकित्सकों के बीच हुए समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की जटिलता सामने आने पर समय पर स्वास्थ्यकर्मियों को सूचना देना और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार कराना जरूरी है।

बलरामपुर जिले के कई ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र भौगोलिक रूप से दूरस्थ हैं। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा मैदानी स्तर पर गर्भवती महिलाओं की निगरानी, स्वास्थ्य जांच और जरूरत के अनुसार रेफरल की व्यवस्था की जा रही है। मितानिन और अन्य स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं से संपर्क कर उन्हें संस्थागत प्रसव और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जागरूक भी करते हैं।

बसंती के मामले में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न टीमों की तत्परता और बेहतर तालमेल से समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी। इसके परिणामस्वरूप तीन स्वस्थ नवजात शिशुओं का जन्म हुआ। यह मामला दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और अति-जोखिम वाली गर्भावस्था में नियमित निगरानी के महत्व को भी रेखांकित करता है। विभाग ने सुरक्षित मातृत्व के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।