आंकड़ों के मुताबिक कुल जन धन खातों का करीब एक चौथाई हिस्सा फिलहाल निष्क्रिय है। वहीं 5,72,35,490 खातों में कोई राशि जमा नहीं है। इन खातों को जीरो बैलेंस अकाउंट के तौर पर दर्ज किया गया है। योजना के तहत सभी जन धन खातों में कुल जमा राशि 3.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
RTI के जवाब में राज्यवार आंकड़े भी सामने आए हैं। निष्क्रिय जन धन खातों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। यहां करीब 3.23 करोड़ खाते निष्क्रिय बताए गए हैं। बिहार में 1.59 करोड़, मध्य प्रदेश में 1.35 करोड़, पश्चिम बंगाल में 1.02 करोड़ और महाराष्ट्र में करीब 97.94 लाख जन धन खाते निष्क्रिय हैं।
जीरो बैलेंस खातों की संख्या में भी उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। यहां 95.92 लाख से अधिक जन धन खातों में कोई राशि जमा नहीं है। बिहार में 62.35 लाख, पश्चिम बंगाल में 37.30 लाख, असम में 36.30 लाख और महाराष्ट्र में 36.04 लाख खाते जीरो बैलेंस वाले बताए गए हैं।
राज्यवार कुल जन धन खातों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 10.51 करोड़ खाते हैं। बिहार में 7.01 करोड़, पश्चिम बंगाल में 5.73 करोड़, राजस्थान में 3.87 करोड़ और महाराष्ट्र में 3.85 करोड़ जन धन खाते दर्ज हैं।
RTI के जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार के पास जन धन खातों के बैलेंस, जीरो बैलेंस और निष्क्रिय खातों का जेंडर के आधार पर अलग-अलग केंद्रीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा 100 रुपये से कम बैलेंस वाले खातों, पिछले पांच वर्षों में बंद किए गए खातों और संदिग्ध लेनदेन या साइबर फ्रॉड के कारण ब्लॉक अथवा फ्रीज किए गए खातों की केंद्रीय स्तर पर अलग जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है।
प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत अगस्त 2014 में राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन के तौर पर की गई थी। इसका उद्देश्य लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना, बेसिक बैंक खाता उपलब्ध कराना, वित्तीय जागरूकता बढ़ाना और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच आसान बनाना था।
अगर किसी व्यक्ति को अपने जन धन खाते की स्थिति जाननी है तो वह संबंधित बैंक के टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकता है। इसके अलावा पासबुक अपडेट कराकर, बैंक शाखा में जाकर या उपलब्ध बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से खाते की स्थिति और लेनदेन की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
RTI से सामने आए ये आंकड़े बताते हैं कि जन धन योजना के तहत बड़ी संख्या में खाते खोले गए हैं, लेकिन उनमें से एक हिस्से का सक्रिय इस्तेमाल नहीं हो रहा है। हालांकि निष्क्रिय या जीरो बैलेंस खाते होने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए केवल इन आंकड़ों के आधार पर योजना की सफलता या विफलता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।