प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रदेशवासियों को दी हरेली तिहार की शुभकामनाएं
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के प्रथम लोकपर्व हरेली तिहार की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने हरेली को प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और कृषि परंपराओं का प्रतीक बताते हुए प्रदेश की खुशहाली और उन्नति की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक पूरे छत्तीसगढ़ में हरेली उत्साह के साथ मनाया जाता है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के प्रथम लोकपर्व हरेली तिहार की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने हरेली के अवसर पर प्रदेश की खुशहाली, उन्नति और समृद्धि की मंगलकामना की।
दीपक बैज ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और कृषि जीवन का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह प्रदेश का पहला प्रमुख लोकपर्व है और इसी के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्योहारों की शुरुआत होती है। हरेली केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी और प्रकृति के साथ लोगों के गहरे जुड़ाव को भी दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हरेली का पर्व पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर किसान अपने कृषि कार्य में उपयोग होने वाले औजारों की पूजा करते हैं। पशुधन की भी पूजा की जाती है और उनकी सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में हरेली का विशेष महत्व है, क्योंकि खेती-किसानी यहां की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार रही है।
पारंपरिक खेलों और लोक संस्कृति का पर्व
हरेली तिहार के अवसर पर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पारंपरिक छत्तीसगढ़िया खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग उत्साह के साथ इन आयोजनों में हिस्सा लेते हैं। पारंपरिक खेलों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है।
दीपक बैज ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की जीवंत पहचान है। इस पर्व के माध्यम से कृषि, पशुधन, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता के बावजूद हरेली पूरे छत्तीसगढ़ को एक सूत्र में जोड़ने वाला लोकपर्व है।
उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक और मैदानी क्षेत्रों से लेकर दूरस्थ ग्रामीण अंचलों तक हरेली तिहार को पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ मनाया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में पर्व मनाने की स्थानीय परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन प्रकृति, कृषि और समृद्धि के प्रति सम्मान इसकी मूल भावना है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने हरेली तिहार के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों से अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं और प्रदेश के सभी नागरिकों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए एक बार फिर हरेली तिहार की शुभकामनाएं दीं।