जगदलपुर में नक्सली सरेंडर की बड़ी तैयारी, डिप्टी सीएम विजय शर्मा बोले– 31 मार्च तक खत्म होगा नक्सलवाद

छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा जगदलपुर रवाना हुए, जहां कुख्यात नक्सली लीडर पापाराव अपने साथियों और हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करेगा। उन्होंने दावा किया कि 31 मार्च तक प्रदेश से नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य है।

Mar 25, 2026 - 13:22
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जगदलपुर में नक्सली सरेंडर की बड़ी तैयारी, डिप्टी सीएम विजय शर्मा बोले– 31 मार्च तक खत्म होगा नक्सलवाद

UNITED NEWS OF ASIA.  छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आ रही है। राज्य के डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा जगदलपुर के लिए रवाना हो गए हैं, जहां एक कुख्यात नक्सली लीडर अपने साथियों और हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने जा रहा है।

रवानगी से पहले मीडिया से चर्चा करते हुए विजय शर्मा ने बताया कि नक्सली लीडर पापाराव आज अपने साथियों के साथ समाज के सामने सरेंडर करेगा। उन्होंने कहा कि इस आत्मसमर्पण में 8 एके-47 सहित अन्य हथियार भी जमा किए जाएंगे। उन्होंने इसे “पुनर्वास” की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना है।

गृहमंत्री ने कहा कि “आज पापाराव का पुनर्वास है। समाज के सामने आत्मसमर्पण होगा और इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जाएगी।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में और भी नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

नक्सलवाद को लेकर सरकार की रणनीति पर बात करते हुए विजय शर्मा ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 31 मार्च तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा है। उनके अनुसार अब केवल 30 से 35 छिटपुट नक्सली ही बचे हैं, जिनका भी जल्द पुनर्वास किया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि कुख्यात नक्सली लीडर गणपति की वर्तमान लोकेशन स्पष्ट नहीं है, जबकि एक अन्य नक्सली मिशीर अब भी सक्रिय बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इनकी तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं।

विजय शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि 31 मार्च को किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा, “31 मार्च की रात कोई ‘हैप्पी न्यू ईयर’ नहीं है। इसके बाद भी एहतियात बरतना जरूरी होगा।” उनके इस बयान से साफ है कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को लगातार जारी रखने के मूड में है।

बस्तर संभाग, खासकर जगदलपुर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का केंद्र रहा है। ऐसे में किसी बड़े नक्सली लीडर का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

सरकार का मानना है कि लगातार चल रहे अभियान, सख्त सुरक्षा व्यवस्था और पुनर्वास नीति के चलते नक्सली संगठन कमजोर हुए हैं। आत्मसमर्पण की यह प्रक्रिया न केवल हिंसा में कमी लाएगी, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में विकास को भी गति देगी।

फिलहाल सभी की नजरें जगदलपुर में होने वाले इस बड़े सरेंडर पर टिकी हैं, जहां यह देखा जाएगा कि सरकार की रणनीति जमीन पर कितनी कारगर साबित होती है।