तिल्दा-नेवरा में बाईपास की कमी से बढ़ी परेशानी, धूल और हादसों से जूझ रहा शहर

रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा में बाईपास सड़क के अभाव के कारण भारी वाहनों का दबाव बढ़ गया है। शहर में धूल, जाम और सड़क हादसों से लोग परेशान हैं और बुनियादी सुविधाओं की मांग तेज हो गई है।

Apr 27, 2026 - 12:31
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तिल्दा-नेवरा में बाईपास की कमी से बढ़ी परेशानी, धूल और हादसों से जूझ रहा शहर

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l  तिल्दा-नेवरा, रायपुर। छत्तीसगढ़ के तिल्दा-नेवरा शहर में बाईपास सड़क की कमी अब गंभीर समस्या बन चुकी है। खरोरा-सिमगा मुख्य मार्ग, जो शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में गिना जाता है, अव्यवस्था और बढ़ते यातायात दबाव के कारण लोगों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बन गया है।

बीते कुछ वर्षों में तिल्दा ब्लॉक को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में तेजी से विकसित किया गया है। यहां कई छोटे-बड़े उद्योग, स्पंज आयरन प्लांट और पावर प्लांट स्थापित हो चुके हैं। इसके साथ ही नए उद्योगों की स्थापना भी लगातार जारी है। औद्योगिक विस्तार के चलते ट्रक, ट्रेलर और हाईवा जैसे भारी वाहनों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे शहर की सड़कें अब क्षमता से अधिक बोझ झेल रही हैं।

स्थिति यह हो गई है कि शहर की सड़कों पर सामान्य वाहनों से अधिक भारी वाहन नजर आते हैं। दिनभर ट्रकों की लंबी कतारें लगी रहती हैं, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जाम की स्थिति आम हो चुकी है और लोगों को रोजाना घंटों तक ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ता है।

इस समस्या का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क पर लगातार धूल उड़ती रहती है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ गया है। स्थानीय लोग अब इस शहर को ‘धूलगढ़’ कहने लगे हैं। धूल के कारण लोगों को सांस संबंधी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सिर्फ धूल ही नहीं, बल्कि सड़क हादसों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। आए दिन दुर्घटनाओं में युवा, महिलाएं और राहगीर घायल हो रहे हैं। बाईपास सड़क नहीं होने के कारण सभी भारी वाहन शहर के बीचों-बीच से गुजरते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां एक ओर उद्योगों को तेजी से एनओसी और जनसुनवाई की अनुमति मिल जाती है, वहीं दूसरी ओर शहर के बुनियादी ढांचे पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। तिल्दा-नेवरा से शासन को भारी राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन इसके बावजूद यहां की मूलभूत जरूरतें अब तक अधूरी हैं।

लोगों का मानना है कि यदि समय रहते बाईपास सड़क का निर्माण कर दिया जाए, तो शहर के अंदर भारी वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि धूल और प्रदूषण की समस्या में भी काफी हद तक कमी आएगी।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को कई बार उठाया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। सरकारें बदलती रही हैं, लेकिन तिल्दा-नेवरा की यह समस्या जस की तस बनी हुई है।

कुल मिलाकर, तिल्दा-नेवरा शहर आज बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। बाईपास सड़क का निर्माण अब शहर की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके और शहर को ‘धूलगढ़’ बनने से बचाया जा सके।