पंडवानी गायिका तीजन बाई के नाम पर मिलेगा राज्य स्तरीय पुरस्कार, संस्कृति मंत्री ने की घोषणा

पंडवानी की महान गायिका स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य स्तरीय पुरस्कार शुरू करने की घोषणा की है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम में यह घोषणा करते हुए उनके परिजनों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की। साथ ही गनियारी गांव के विकास और तीजन बाई के ऐतिहासिक तंबूरे को घासीदास संग्रहालय में संरक्षित करने का ऐलान किया।

Jul 8, 2026 - 15:54
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पंडवानी गायिका तीजन बाई के नाम पर मिलेगा राज्य स्तरीय पुरस्कार, संस्कृति मंत्री ने की घोषणा

UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर l पंडवानी की विश्वविख्यात गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। रायपुर में आयोजित सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने ऐलान किया कि अब पंडवानी कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को स्वर्गीय तीजन बाई राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री ने तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्भुत कला और सशक्त प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पंडवानी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने तीजन बाई के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक भी प्रदान किया। उन्होंने कहा कि सरकार उनके परिवार के साथ हर संभव सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और प्रदेश उनकी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए लगातार प्रयास करेगा।

संस्कृति मंत्री ने यह भी घोषणा की कि तीजन बाई के पैतृक गांव गनियारी का समग्र विकास किया जाएगा। गांव को उनकी सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप विकसित किया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोग उनके जीवन, संघर्ष और कला से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए राजेश अग्रवाल ने बताया कि तीजन बाई द्वारा वर्षों तक उपयोग किया गया ऐतिहासिक तंबूरा अब रायपुर स्थित घासीदास संग्रहालय में संरक्षित और प्रदर्शित किया जाएगा। इससे आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और कला प्रेमियों को उनकी विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। संस्कृति विभाग उनकी स्मृतियों, कला और योगदान से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण सामग्री को भी सुरक्षित रखने की दिशा में कार्य करेगा।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलाकार, साहित्यकार, लोककला प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने तीजन बाई के कला जीवन को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी विशिष्ट पंडवानी शैली के माध्यम से महाभारत की कथाओं को लोकभाषा में जीवंत कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच तक पहुंचाया।

राज्य सरकार की इन घोषणाओं को पंडवानी कला और लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल तीजन बाई की स्मृतियां आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचेंगी, बल्कि प्रदेश की समृद्ध लोककलाओं को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।