उद्घाटन से पहले दम तोड़ गया रीपा पार्क, करोड़ों की परियोजना पर भ्रष्टाचार के आरोप
बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चांदो में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) परियोजना उद्घाटन से पहले ही बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। भवन में दरारें, जंग खाती मशीनें और चोरी हुए उपकरणों को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण में अनियमितता और लापरवाही के आरोप लगाए हैं। प्रशासन से मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड की ग्राम पंचायत चांदो में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) परियोजना गंभीर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई यह महत्वाकांक्षी योजना उद्घाटन से पहले ही बदहाल हो चुकी है। निर्माण कार्य में अनियमितता और लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की सरकारी राशि व्यर्थ होती दिखाई दे रही है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023-24 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चांदो में रीपा इंडस्ट्रियल पार्क का निर्माण कराया गया था। इस परियोजना का उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार से जोड़ना और ग्रामीण क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना था। लेकिन वर्तमान में परियोजना का अधिकांश हिस्सा उपयोग से पहले ही जर्जर स्थिति में पहुंच गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब रही। भवन में उद्घाटन से पहले ही कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। इसके अलावा रोजगार गतिविधियों के लिए लाई गई महंगी मशीनें लंबे समय से उपयोग न होने के कारण जंग खा रही हैं। कुछ मशीनें खराब होने की स्थिति में पहुंच चुकी हैं, जबकि परिसर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे और अन्य उपकरण चोरी होने की भी बात सामने आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद भी इसे संचालित नहीं किया गया। देखरेख के अभाव में पूरी योजना धीरे-धीरे निष्प्रभावी होती गई। ग्रामीणों का दावा है कि परियोजना को अब तक पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificate) भी प्राप्त नहीं हुआ है, जबकि निर्माण कार्य पहले ही नुकसान झेल रहा है।
ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन और जिला प्रशासन पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकार बदलने के बाद इस परियोजना की निगरानी और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति बर्बादी की कगार पर पहुंच गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित रखरखाव किया जाता तो मशीनें सुरक्षित रहतीं और महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार का लाभ मिल सकता था।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा करने तथा यदि अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।