15 जुलाई के शिक्षक आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन, शंकर साहू बोले- सरकार पूरी करे मोदी की गारंटी

छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन ने 15 जुलाई को रायपुर में आयोजित सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के आंदोलन को खुला समर्थन देने की घोषणा की है। संगठन ने सात सूत्रीय लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की मांग करते हुए प्रदेशभर के शिक्षक एलबी संवर्ग से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

Jul 14, 2026 - 10:48
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15 जुलाई के शिक्षक आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन, शंकर साहू बोले- सरकार पूरी करे मोदी की गारंटी

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद खान, मानपुर l छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की सात सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर 15 जुलाई को प्रस्तावित आंदोलन को अब व्यापक समर्थन मिलने लगा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन ने रायपुर के तूता मैदान में आयोजित सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन और विधानसभा घेराव को खुला समर्थन देने की घोषणा की है। संगठन ने प्रदेशभर के शिक्षक एलबी संवर्ग से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू ने कहा कि शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने सरकार से विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की मांग करते हुए कहा कि "मोदी की गारंटी" के अनुरूप शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।

संगठन का कहना है कि सात सूत्रीय मांगों में वेतन विसंगति का निराकरण, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना के आधार पर क्रमोन्नत वेतनमान, पुरानी पेंशन योजना का लाभ, सेवा संबंधी अन्य लंबित मुद्दों का समाधान तथा पदोन्नति सहित विभिन्न मांगें शामिल हैं। फेडरेशन का आरोप है कि लंबे समय से इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है।

शिक्षक फेडरेशन ने वीएसके (VSK) ऐप को भी अव्यावहारिक बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि प्रदेश के अनेक ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। ऐसे में ऑनलाइन उपस्थिति और अन्य कार्यों के लिए ऐप का उपयोग शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। तकनीकी खामियों के चलते कई बार अनावश्यक मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है।

फेडरेशन ने टीईटी की अनिवार्यता पर भी आपत्ति जताई है। संगठन के अनुसार 20 से 25 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है। संगठन ने इस संबंध में आवश्यक संशोधन कर निर्णय वापस लेने की मांग की है।

शिक्षक नेताओं का कहना है कि वर्तमान में शिक्षकों को 27 से अधिक मोबाइल ऐप और ऑनलाइन कार्यों का दायित्व निभाना पड़ रहा है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। उनका मानना है कि शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम किया जाना चाहिए, ताकि वे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकें।

फेडरेशन के प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्रदेशभर के शिक्षक एलबी संवर्ग से 15 जुलाई को रायपुर के तूता मैदान में आयोजित धरना-प्रदर्शन और विधानसभा घेराव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन शिक्षकों के अधिकारों और लंबित मांगों के समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का प्रयास है।