चौराहे पर तांत्रिक क्रिया के चिन्ह मिलने से फैली दहशत, टूटी चूड़ियां, मिर्च, नींबू और काला कपड़ा बना चर्चा का विषय
सरगुजा जिले के लखनपुर नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 07 में चौराहे पर तांत्रिक क्रिया से जुड़े चिन्ह, टूटी चूड़ियां, सिंदूर, काला कपड़ा, मिर्च और नींबू मिलने से क्षेत्र में भय और अनहोनी की आशंका का माहौल बन गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. सरगुजा/अंबिकापुर, लखनपुर। छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आज भी अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की परंपराएं पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी हैं। झाड़-फूंक, टोना-टोटका और तांत्रिक क्रियाओं में आस्था रखने वाले लोग अब भी समाज में मौजूद हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के नगर पंचायत लखनपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय लोगों में भय और आशंका का माहौल पैदा कर दिया है।
नगर पंचायत लखनपुर के वार्ड क्रमांक 07 में 20 जनवरी की रात चौराहे पर तांत्रिक क्रिया से जुड़े चिन्ह मिलने के बाद वार्डवासियों में अनहोनी की आशंका गहराने लगी है। चौराहे की सड़क पर ताराकृत आकृति में खींची गई रेखाएं, सिंदूर, टूटी हुई चूड़ियां, काले कपड़े के टुकड़े, मिर्च और नींबू बिखरे हुए पाए गए। सुबह जब स्थानीय लोगों की नजर इन सामग्रियों पर पड़ी तो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यह किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा किसी विशेष व्यक्ति, परिवार अथवा क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से की गई तांत्रिक क्रिया हो सकती है। कई लोग इसे अपशकुन और अनिष्ट की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं, जिसके चलते वार्ड में भय और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
हालांकि तंत्र-मंत्र और टोना-टोटका को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अंधविश्वास माना जाता है, लेकिन समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी इन पर विश्वास करता है। खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि अब शहरी इलाकों में भी ऐसी घटनाओं का सामने आना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करती हैं और अनावश्यक डर का माहौल बनाती हैं। वहीं कुछ जागरूक नागरिकों ने इसे महज अफवाह और अंधविश्वास बताकर लोगों से संयम बरतने और डर से दूर रहने की अपील की है।
फिलहाल चौराहे पर मिले इन तांत्रिक चिन्हों और सामग्रियों का रहस्य क्या है, यह तो जानकार या संबंधित व्यक्ति ही स्पष्ट कर सकते हैं। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की जड़ों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।