प्रोजेक्ट धड़कन से बदली जिंदगी: नारायणपुर की पारूल को मिली नई धड़कन
नारायणपुर जिले के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा को “प्रोजेक्ट धड़कन” के तहत नई जिंदगी मिली। समय पर पहचान और रायपुर में सफल हृदय सर्जरी के बाद अब पारूल स्वस्थ होकर घर लौट आई है।
UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से एक भावुक और प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जहां “प्रोजेक्ट धड़कन” ने एक नन्हीं जिंदगी को नया जीवन दिया है। जिले के अबूझमाड़ अंचल के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा, जो कुछ समय पहले तक गंभीर हृदय समस्या से जूझ रही थी, अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट आई है और मुस्कुराते हुए बचपन जी रही है।
पारूल के माता-पिता के लिए यह समय बेहद कठिन था। बच्ची जल्दी थक जाती थी और सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। गांव में सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण परिवार को उसकी बीमारी का सही कारण पता नहीं चल पा रहा था। लेकिन फरवरी 2026 में शुरू किए गए “प्रोजेक्ट धड़कन” ने उनके जीवन में उम्मीद की किरण जगा दी।
इस विशेष अभियान का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की हृदय संबंधी जांच करना है, ताकि गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर उनका इलाज किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर स्क्रीनिंग की और पहले चरण में 3000 से अधिक बच्चों की जांच की गई। इसी दौरान पारूल समेत तीन बच्चों में हृदय रोग के लक्षण पाए गए।
पारूल की स्थिति सामने आते ही जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर भेजा। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने बच्चों को रवाना करते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने पारूल की विस्तृत जांच की, जिसमें उसके हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि हुई।
डॉक्टरों की सलाह पर 10 अप्रैल 2026 को पारूल की सफल हृदय सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया और धीरे-धीरे उसकी स्थिति में सुधार होता गया। अब पारूल पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने गांव लौट चुकी है और परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी रही है।
कलेक्टर नम्रता जैन ने इस पहल को बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि “प्रोजेक्ट धड़कन” का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम और सभी संबंधित अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की।
पारूल की यह कहानी केवल एक सफल सर्जरी की नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन और प्रभावी स्वास्थ्य योजनाओं की सफलता का प्रतीक है। यह दर्शाती है कि यदि सही समय पर सही कदम उठाए जाएं, तो दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं। “प्रोजेक्ट धड़कन” अब नारायणपुर के लिए एक उम्मीद बन चुका है, जो नन्हीं जिंदगियों को नई धड़कन दे रहा है।