सुकमा में पोस्टमार्टम में देरी पर बवाल: शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन, अस्पताल पर लापरवाही के आरोप
सुकमा में पोस्टमार्टम में देरी को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी के नेतृत्व में शव सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया गया और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजेंट गिरी,सुकमा। सुकमा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पोस्टमार्टम (पीएम) में हो रही देरी को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश उस समय फूट पड़ा, जब एक मृतक का शव घंटों तक अस्पताल में पड़ा रहा और प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, किरकिपाल निवासी फूल कुमार बघेल की नदी में डूबने से मौत हो गई थी। घटना के बाद शव को पहले छिंदगढ़ अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक प्रक्रिया के बाद उसे सुकमा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लेकिन घटना के एक दिन बाद भी पोस्टमार्टम नहीं हो सका, जिससे परिजनों का धैर्य जवाब दे गया।
गुरुवार को नाराज परिजन और स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय और जिला अस्पताल के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मृतक के शव को सड़क पर रखकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।
प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। परिजनों का कहना था कि एक गरीब परिवार को अपने मृतक के अंतिम संस्कार के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जो बेहद पीड़ादायक है। उनका आरोप था कि यदि समय पर पोस्टमार्टम कर दिया जाता, तो उन्हें इस तरह सड़क पर उतरने की नौबत नहीं आती।
इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी ने भी प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी तरह से विफलता को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की उदासीनता के कारण परिजनों को पूरे दिन से ज्यादा समय तक इंतजार करना पड़ा, जो अमानवीय है।
हरीश कवासी ने आगे कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर उग्र आंदोलन करेगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि अस्पतालों में संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के कारण ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आ रही हैं।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन घटना के बाद अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की सख्त जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके और आम नागरिकों को समय पर उचित सुविधा मिल सके।