सुकमा पुलिस का अनूठा प्रयास: “विग्रह से विश्वास” अभियान के तहत आयोजित हुआ जुम्बा कार्यक्रम

छत्तीसगढ़ सुकमा में पुलिस विभाग द्वारा “विग्रह से विश्वास की ओर एक मजबूत कदम” अभियान के तहत जुम्बा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस जवानों के साथ पुनर्वास केंद्र में रह रहे आत्मसमर्पित माओवादी भी शामिल हुए।

May 14, 2026 - 17:23
May 14, 2026 - 17:39
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सुकमा पुलिस का अनूठा प्रयास: “विग्रह से विश्वास” अभियान के तहत आयोजित हुआ जुम्बा कार्यक्रम

UNITED NEWS OF ASIA. रीजेंट गिरी l सुकमा जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा समाज में विश्वास और सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई। पुलिस लाइन सुकमा में “विग्रह से विश्वास की ओर एक मजबूत कदम” अभियान के तहत विशेष जुम्बा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा मुख्यधारा से जुड़ चुके आत्मसमर्पित माओवादियों में आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना था।

कार्यक्रम का आयोजन पुलिस अधीक्षक Kiran Chavan एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Rohit Shah के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में जिला मुख्यालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, पुलिस जवानों तथा “पूना मारगेम” पुनर्वास एवं पुनर्जीवन अभियान के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर पुनर्वास केंद्र में रह रहे पूर्व माओवादी शामिल हुए।

जुम्बा कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगीत की धुनों पर पुलिस जवानों और आत्मसमर्पित माओवादियों ने एक साथ कदम मिलाए, जिससे भाईचारे और विश्वास का संदेश देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान सकारात्मक माहौल बना रहा और प्रतिभागियों में नई ऊर्जा दिखाई दी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि “विग्रह से विश्वास” अभियान का मुख्य उद्देश्य हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों को समाज के साथ जोड़ना और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। इसी दिशा में “पूना मारगेम” अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

अधिकारियों ने कहा कि केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही पुलिस का कार्य नहीं है, बल्कि समाज में विश्वास कायम करना और भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। ऐसे कार्यक्रमों से आत्मसमर्पित माओवादियों के मन में सकारात्मक सोच विकसित होती है और वे सामान्य जीवन की ओर तेजी से आगे बढ़ते हैं।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में इस प्रकार के सामाजिक और प्रेरणादायी आयोजन शांति एवं विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में सुकमा और बस्तर क्षेत्र में कई माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। शासन और पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास अभियानों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। “विग्रह से विश्वास” जैसे कार्यक्रम इसी बदलाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।