सुकमा के इंजरम गांव को ग्राम सभा ने घोषित किया 'पादरी नो एंट्री जोन'

सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के इंजरम गांव की ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से गांव को 'पादरी नो एंट्री जोन' घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया। ग्राम सभा ने बिना अनुमति प्रार्थना सभा, चंगाई सभा और धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्णय लिया। प्रशासन ने कानून के दायरे में शांति बनाए रखने की अपील की है।

Jul 19, 2026 - 12:19
 0  3
सुकमा के इंजरम गांव को ग्राम सभा ने घोषित किया 'पादरी नो एंट्री जोन'

UNITED NEWS OF ASIA. रिजेंट गिरी, सुकमा l छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में धर्मांतरण और बाहरी धार्मिक गतिविधियों को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला सामने आया है। कोंटा विकासखंड के ग्राम पंचायत इंजरम की ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से गांव को 'पादरी नो एंट्री जोन' घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया है। इस निर्णय के तहत अब ग्राम सभा की अनुमति के बिना गांव में किसी भी प्रकार की प्रार्थना सभा, चंगाई सभा अथवा अन्य धार्मिक आयोजन आयोजित नहीं किए जा सकेंगे।

ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार गांव में धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। ग्रामवासियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य गांव की परंपरा, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना है।

ग्राम पंचायत के सरपंच सलवम राजाराम ने बताया कि पिछले कुछ समय से गांव में कुछ ऐसी गतिविधियां सामने आ रही थीं, जिनसे सामाजिक माहौल प्रभावित होने की आशंका थी। इसी को देखते हुए ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया। उनका कहना है कि गांव की एकता और पारंपरिक व्यवस्था को बनाए रखना ग्राम सभा की प्राथमिकता है।

ग्रामवासियों ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग गांव में आकर लोगों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इस संबंध में किसी आधिकारिक जांच या निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।

बताया जा रहा है कि सुकमा जिले में इससे पहले फंदीगुड़ा और दरभागुड़ा गांवों की ग्राम सभाओं में भी इसी तरह के प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं। अब इंजरम ग्राम सभा के इस निर्णय के बाद पूरे जिले में इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है।

प्रशासन ने मामले को लेकर सभी पक्षों से शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि ग्राम सभा द्वारा लिए गए सभी निर्णय संविधान और लागू कानूनों के दायरे में ही प्रभावी होंगे तथा किसी भी प्रकार की कार्रवाई विधिक प्रावधानों के अनुरूप ही की जाएगी।

गौरतलब है कि धर्मांतरण और धार्मिक आयोजनों से जुड़े विषय संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन का कहना है कि किसी भी शिकायत या विवाद की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा और सभी पक्षों के अधिकारों तथा कानून-व्यवस्था का ध्यान रखा जाएगा।

इंजरम ग्राम सभा का यह फैसला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।