आरबीएसके के चिरायु दल ने जन्मजात कटे होंठ और तालु से पीड़ित बालक को दी नई मुस्कान

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत चिरायु दल ने बीजापुर जिले के 15 वर्षीय बालक माड़कम हुंगा का सफल उपचार कर जन्मजात क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट (कटे होंठ और तालु) की समस्या से मुक्ति दिलाई। रायपुर में हुई सफल सर्जरी और शासन द्वारा वहन किए गए पूरे उपचार खर्च से बालक को नया जीवन और परिवार को बड़ी राहत मिली।

Jul 4, 2026 - 11:11
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आरबीएसके के चिरायु दल ने जन्मजात कटे होंठ और तालु से पीड़ित बालक को दी नई मुस्कान

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित चिरायु दल लगातार दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर गंभीर जन्मजात बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी अभियान के तहत बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड) निवासी 15 वर्षीय बालक माड़कम हुंगा को जन्मजात क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट यानी कटे होंठ और तालु की समस्या से सफलतापूर्वक मुक्ति दिलाई गई।

माड़कम हुंगा जन्म से ही इस जन्मजात विकृति से पीड़ित था। इस कारण उसे भोजन करने, स्पष्ट रूप से बोलने और सामान्य सामाजिक जीवन जीने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगा उपचार कराना संभव नहीं था, जिससे कई वर्षों तक उसका इलाज नहीं हो सका।

आरबीएसके के चिरायु दल ने विद्यालय में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बालक की पहचान की। जांच के दौरान समस्या की गंभीरता को देखते हुए टीम ने तत्काल आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर उच्चस्तरीय उपचार के लिए रेफरल की व्यवस्था की। इसके बाद 25 जून 2026 को बालक को रायपुर स्थित श्री मेडिसिन अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट की सफल प्लास्टिक सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद चिकित्सकीय निगरानी में बालक के स्वास्थ्य में लगातार सुधार होता गया। उपचार सफल रहने के बाद 30 जून 2026 को उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब बालक सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है और उसके चेहरे पर नई मुस्कान दिखाई दे रही है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत इस पूरे उपचार का खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इसमें सर्जरी, सभी आवश्यक जांच, दवाइयां, बीजापुर से रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था, उपचार के दौरान रहने और भोजन की सुविधा भी शामिल रही। इससे परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा और उन्हें निःशुल्क बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि चिरायु दल का उद्देश्य दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों में जन्मजात बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध कराना है। इस पहल से अनेक बच्चों को नया जीवन मिल रहा है और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है।

यह सफलता दर्शाती है कि समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, प्रभावी रेफरल व्यवस्था और शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के समन्वित प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों तक भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। चिरायु दल की यह पहल न केवल बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार ला रही है, बल्कि उनके भविष्य को भी नई दिशा और आत्मविश्वास प्रदान कर रही है।