रायपुर नगर निगम पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने के आरोप, संजय जैन की जमीन पर कब्जे को लेकर उठे सवाल

रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 7 में खसरा नंबर 772/10 और 772/11 की जमीन पर कथित अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पीड़ित संजय जैन ने बिना भवन अनुज्ञा निर्माण किए जाने और प्रशासनिक संरक्षण मिलने के आरोप लगाए हैं। नगर निगम अधिकारियों और महापौर की प्रतिक्रिया के बाद अब पूरे मामले में कार्रवाई और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

May 23, 2026 - 12:12
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रायपुर नगर निगम पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने के आरोप, संजय जैन की जमीन पर कब्जे को लेकर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 7 में कथित अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला खसरा नंबर 772/10 और 772/11 की उस जमीन से जुड़ा है, जिसे संजय जैन की निजी भूमि बताया जा रहा है। आरोप है कि इस जमीन पर बिना भवन निर्माण अनुज्ञा के निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन नगर निगम प्रशासन कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालता नजर आ रहा है।

जानकारी के अनुसार पीड़ित संजय जैन ने कई बार नगर निगम और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतों के बाद प्रशासन ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने के लिए स्टे आदेश जारी किया, लेकिन अब तक अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई नहीं की गई है। इससे निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

मामले में जब महापौर मीनल चौबे से सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं है और संबंधित जानकारी जोन 7 कार्यालय से ली जाए। महापौर के इस जवाब के बाद विपक्षी और स्थानीय लोग निगम प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं।

जोन 7 कार्यालय में मौजूद सब इंजीनियर प्रेरणा अग्रवाल ने स्वीकार किया कि संबंधित निर्माण के लिए नगर निगम की ओर से कोई भवन निर्माण अनुज्ञा जारी नहीं की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जोन आयुक्त की ओर से लिखित आदेश प्राप्त होता है तो बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं जोन 7 आयुक्त अनिल ध्रुव ने मामले में सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने की बात कही। उनका कहना है कि जमीन का सीमांकन होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इस जवाब के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम प्रशासन रसूखदार लोगों को संरक्षण दे रहा है और इसी वजह से कार्रवाई में देरी हो रही है।

नगर निगम के नियमों के अनुसार बिना अनुमति निर्माण और विवादित संपत्तियों पर तत्काल कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब अधिकारियों ने स्वयं यह स्वीकार कर लिया कि भवन निर्माण अनुज्ञा जारी नहीं हुई, तो अब तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

शहर में पहले भी छोटे दुकानदारों और आम नागरिकों के खिलाफ निगम द्वारा तत्काल बुलडोजर कार्रवाई किए जाने के कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। ऐसे में इस मामले में देरी को लेकर दोहरे मापदंड के आरोप लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि कोई आम व्यक्ति बिना अनुमति निर्माण करता तो अब तक कार्रवाई हो चुकी होती।

पूरा मामला अब नगर निगम प्रशासन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे। वहीं शहरवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि निगम प्रशासन सीमांकन के बाद वास्तव में कार्रवाई करता है या मामला केवल फाइलों तक सीमित रह जाता है।