बालको का ‘ब्लैक मेज़’ बना महिला सशक्तिकरण की नई पहचान, 6000 से अधिक महिलाएं जुड़ीं आत्मनिर्भरता से
बालकोनगर में शुरू हुआ ‘ब्लैक मेज़’ कैफे महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनकर उभरा है। प्रोजेक्ट उन्नति से जुड़ी महिलाओं द्वारा संचालित यह फाइन डाइनिंग कैफे आज सामुदायिक विकास, उद्यमिता और आजीविका सृजन का प्रेरक मॉडल बन चुका है। बालको की इस पहल से 6000 से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l बालकोनगर में शुरू हुआ ‘ब्लैक मेज़’ कैफे महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास का नया उदाहरण बनकर सामने आया है। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने इस फाइन डाइनिंग कैफे का शुभारंभ किया। प्रोजेक्ट उन्नति से जुड़ी महिलाओं द्वारा संचालित यह कैफे आज न केवल स्वाद और आतिथ्य का केंद्र बना है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण की नई पहचान भी बन चुका है।
‘ब्लैक मेज़’ की शुरुआत एक छोटे से फास्ट-फूड केंद्र ‘उन्नति चौपाल’ के रूप में हुई थी, जहां चाट-पकौड़ी और स्थानीय व्यंजन परोसे जाते थे। समय के साथ महिलाओं के प्रशिक्षण, मेहनत और आत्मविश्वास ने इसे आधुनिक फाइन डाइनिंग कैफे का रूप दे दिया। आज यहां 50 से अधिक लोगों के बैठने की सुविधा है और निजी आयोजनों के लिए विशेष डाइनिंग स्पेस भी तैयार किया गया है।
कैफे का संचालन स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कर रही हैं। इन महिलाओं को प्रोजेक्ट उन्नति के माध्यम से व्यंजन कला, ग्राहक प्रबंधन, आतिथ्य सेवा, खाद्य गुणवत्ता और उद्यमिता जैसे विषयों में प्रशिक्षण दिया गया। इस पहल ने महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान किया।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि संस्था महिलाओं की आजीविका क्षमता और सम्मान को बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आसपास के क्षेत्रों की 6000 से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भरता और अपने परिवारों के विकास की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘ब्लैक मेज़’ जैसी पहल अन्य महिलाओं को भी आगे आने और अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित करेगी।
उन्नति समूह की सदस्य निर्मला देशमुख ने बताया कि 2022 में प्रोजेक्ट उन्नति से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने कहा कि पहले उनके पास हुनर था, लेकिन उसे मंच नहीं मिल पाया था। बालको के सहयोग ने उन्हें अपनी प्रतिभा को पहचान दिलाने का अवसर दिया।
समूह की सदस्य भारती ने कहा कि ‘ब्लैक मेज़’ से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी क्षमता पर विश्वास बढ़ा है। उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि उनकी बेटी ने मजाक में कहा कि अब घर का स्वाद चखने के लिए भी शायद कैफे आना पड़ेगा। इस बात ने उन्हें अपनी उपलब्धि का एहसास कराया।
‘ब्लैक मेज़’ का मेन्यू भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। यहां छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन, उत्तर भारतीय भोजन, चाइनीज़ डिश और लोकप्रिय फास्ट-फूड का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। कैफे का वातावरण स्थानीय संस्कृति और आधुनिकता का सुंदर मेल प्रस्तुत करता है।
कोरबा से आए ग्राहकों ने भी कैफे की सराहना की। लोगों का कहना है कि यहां भोजन के साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को भी खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है।
प्रोजेक्ट उन्नति के माध्यम से अब तक 560 से अधिक स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा जा चुका है। इन समूहों से जुड़ी 6000 से अधिक महिलाएं उन्नति महासंघ के जरिए विभिन्न सूक्ष्म और लघु उद्यमों का संचालन कर रही हैं। ‘ब्लैक मेज़’ आज केवल एक कैफे नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व और सतत उद्यमिता का सफल मॉडल बनकर उभरा है।