रायपुर DEO कार्यालय में अभिलेख जलने का मामला गरमाया, निजी स्कूलों के रिकॉर्ड दोबारा मांगे गए
रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की मान्यता शाखा में महत्वपूर्ण शासकीय अभिलेख आग में नष्ट होने के मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के बाद करीब 850 निजी विद्यालयों से वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक के दस्तावेज दोबारा मांगे गए हैं। मामले में रिकॉर्ड गायब होने, RTE भुगतान और मान्यता प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों के बीच स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की मान्यता शाखा में महत्वपूर्ण शासकीय अभिलेख आग में नष्ट होने का मामला अब गंभीर विवाद का रूप लेता जा रहा है। घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार मान्यता शाखा से जुड़े मूल दस्तावेज और नस्तियां जलने के बाद करीब 850 निजी विद्यालयों से वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक के दस्तावेज दोबारा जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि आग में नष्ट हुए अभिलेखों में निजी विद्यालयों की मान्यता, नवीनीकरण, निरीक्षण प्रतिवेदन, आय-व्यय विवरण, वित्तीय दस्तावेज और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत किए गए करोड़ों रुपये के भुगतान से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। ऐसे में मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
इस प्रकरण को लेकर पहले भी मान्यता शाखा से रिकॉर्ड गायब होने की शिकायत पुलिस विभाग और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी थी। हालांकि अब तक इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण पूरे घटनाक्रम पर संदेह गहराता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने मामले को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है।
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय का नाम भी चर्चा में है। आरोप है कि निजी विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया में अनियमितताओं से संबंधित शिकायतें पहले से लंबित हैं। विधानसभा में भी स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा इस संबंध में जांच जारी होने की बात कही जा चुकी है। अब रिकॉर्ड आग में जलने की घटना सामने आने के बाद पूरे मामले की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।
घटना के बाद पुलिस कमिश्नर, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को शिकायत सौंपकर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायत में आगजनी की घटना की स्वतंत्र जांच कराने, शेष उपलब्ध रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने, RTE भुगतान और निजी विद्यालय मान्यता प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराने तथा रिकॉर्ड गायब होने और अभिलेख जलने की घटनाओं की संयुक्त जांच कराने की मांग की गई है।
इसके साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग भी की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं किए गए और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो कई महत्वपूर्ण जानकारियां हमेशा के लिए नष्ट हो सकती हैं। वहीं निजी विद्यालय संचालकों में भी चिंता का माहौल है, क्योंकि वर्षों पुराने दस्तावेज दोबारा उपलब्ध कराना कई संस्थानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग और प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन आगजनी और रिकॉर्ड गायब होने की घटनाओं ने सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।