सरकारी रेट 120, जनता से वसूली 130 — रायपुर की शराब दुकानों में ओवररेटिंग का खेल, आबकारी विभाग पर उठे सवाल

राजधानी रायपुर के कचना भट्टी क्षेत्र स्थित शराब दुकान में निर्धारित कीमत से अधिक दर पर शराब बेचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 120 रुपये की शराब 130 रुपये में बेची जा रही है। स्थानीय लोगों ने आबकारी विभाग और दुकान प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

May 9, 2026 - 10:56
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सरकारी रेट 120, जनता से वसूली 130 — रायपुर की शराब दुकानों में ओवररेटिंग का खेल, आबकारी विभाग पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कचना भट्टी क्षेत्र स्थित शराब दुकान में कथित ओवररेटिंग का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि जिस शराब की सरकारी कीमत 120 रुपये तय है, उसे ग्राहकों से 130 रुपये में बेचा जा रहा है। यह मामला केवल 10 रुपये अतिरिक्त वसूली का नहीं, बल्कि रोजाना हजारों रुपये की अवैध कमाई और आम जनता के आर्थिक शोषण से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब दुकानों में लंबे समय से निर्धारित दर से अधिक पैसे लिए जा रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल आबकारी विभाग की जानकारी और संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकता। यदि सरकार ने शराब की कीमत तय कर रखी है, तो फिर दुकानों में मनमानी वसूली क्यों हो रही है, यह सबसे बड़ा सवाल बन चुका है।

सुपरवाइजर और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल

कचना भट्टी शराब दुकान के सुपरवाइजर पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान में कर्मचारियों से खुलेआम अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं और इसकी जानकारी प्रबंधन को पूरी तरह है। इसके बावजूद न तो किसी कर्मचारी पर कार्रवाई की जा रही है और न ही ग्राहकों को राहत मिल रही है। ऐसे में लोगों ने सुपरवाइजर को तत्काल हटाने और उसके खिलाफ विभागीय जांच की मांग की है।

ग्राहकों का कहना है कि गरीब और मेहनतकश लोग अपनी मेहनत की कमाई से शराब खरीदते हैं, लेकिन उनसे जबरन अतिरिक्त पैसा लेना सीधा आर्थिक शोषण है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि कोई ग्राहक अतिरिक्त पैसे देने का विरोध करता है, तो उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में आबकारी विभाग की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग को इस अवैध वसूली की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट माना जाएगा कि जिम्मेदार अधिकारियों की मौन सहमति इस पूरे खेल में शामिल है।

जनता की प्रमुख मांगें

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से कई महत्वपूर्ण मांगें की हैं। इनमें कचना भट्टी शराब दुकान की तत्काल जांच, ओवररेटिंग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई, शराब दुकान के सुपरवाइजर को हटाने, संबंधित आबकारी अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने और उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग शामिल है।

इसके अलावा लोगों ने सभी शराब दुकानों में रेट सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने और नियमित निगरानी बढ़ाने की भी मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की शिकायतें सामने न आएं।

जनता चाहती है जवाब

रायपुर में सामने आया यह मामला अब केवल ओवररेटिंग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता से भी जुड़ गया है। जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर सरकारी रेट के नाम पर खुलेआम अतिरिक्त वसूली कब तक जारी रहेगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी।