यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला के निर्देशन में, डीसीपी मध्य जोन उमेश प्रसाद गुप्ता और डीसीपी पश्चिम जोन संदीप पटेल के मार्गदर्शन में की गई। पुलिस ने थाना गंज क्षेत्र के पिथालिया कॉम्प्लेक्स और न्यू राजेन्द्र नगर स्थित अंजनी टॉवर में एक साथ दबिश देकर इस बड़े गिरोह का खुलासा किया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी हाईटेक तरीके से कॉल सेंटर संचालित कर विदेशों, विशेष रूप से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाते थे। वे लोन दिलाने, सिबिल स्कोर सुधारने और फर्जी ट्रांजेक्शन के नाम पर लोगों को झांसा देते थे।
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। सबसे पहले आरोपी डेटा इकट्ठा कर विदेशी नागरिकों को कॉल करते थे। इसके बाद उनकी बैंकिंग जानकारी लेकर फर्जी चेक के जरिए उनके खाते में छोटी राशि डालते थे और फिर “सिबिल सुधार” का दावा कर गिफ्ट कार्ड के रूप में पैसे वापस मांगते थे। इन गिफ्ट कार्ड्स को बाद में नकदी में बदलकर हवाला के जरिए मुख्य सरगना तक पहुंचाया जाता था।
इस पूरे नेटवर्क में अलग-अलग ग्रुप बनाए गए थे—कॉलिंग ग्रुप, डिपॉजिट ग्रुप, टेक्निकल ग्रुप और रिडीम ग्रुप—जो अपने-अपने स्तर पर काम करते थे। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के तार देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों, विशेषकर चीन तक जुड़े हुए हैं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 67 मोबाइल फोन, 18 लैपटॉप, 28 कंप्यूटर सेट और 3 वाईफाई राउटर जब्त किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 16.53 लाख रुपये बताई गई है।
इस मामले में थाना गंज और थाना न्यू राजेन्द्र नगर में बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धाराओं 66(सी) एवं 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के दो मुख्य सरगना गुजरात निवासी हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे इस अवैध गतिविधि में शामिल थे और उन्हें इसके बदले वेतन के साथ कमीशन भी दिया जाता था।
रायपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई गई है और ऐसे संगठित गिरोहों पर लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ऑफर से सावधान रहें और तुरंत पुलिस को सूचना दें।