60 लाख के डेम को JCB से तोड़ने का आरोप, 5 माह बाद भी कार्रवाई नहीं—ग्रामीणों ने जनदर्शन में उठाई आवाज

रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ क्षेत्र में 60 लाख की लागत से बने डेम को तोड़े जाने के मामले में 5 माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कर नाराजगी जताई।

Apr 6, 2026 - 17:43
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60 लाख के डेम को JCB से तोड़ने का आरोप, 5 माह बाद भी कार्रवाई नहीं—ग्रामीणों ने जनदर्शन में उठाई आवाज

UNITED NEWS OF ASIA. महेन्द्र कुमार अग्रवाल रायपुर । रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ ब्लॉक अंतर्गत छाल तहसील के ग्राम कटाईपाली में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां लगभग 60 लाख रुपये की लागत से निर्मित डेम को कथित रूप से जेसीबी मशीन से तोड़ दिया गया। इस घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, खासकर इसलिए क्योंकि शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह डेम शासन द्वारा क्षेत्र में जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था। लेकिन गांव के ही एक किसान ने बिना प्रशासनिक अनुमति के इसे जेसीबी मशीन से तोड़ दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने लगभग पांच माह पहले ही कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी।

आवेदक संतराम राठिया के मुताबिक, इतने गंभीर मामले के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों का प्रशासन पर से भरोसा डगमगाने लगा है। उनका कहना है कि जब जनदर्शन जैसे मंच पर भी शिकायतों का समाधान नहीं होता, तो आम जनता कहां जाए।

इसी नाराजगी के चलते संतराम राठिया अपने साथियों और गांव के सरपंच के साथ पुनः कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे और इस मामले को फिर से उठाया। उन्होंने लिखित आवेदन के माध्यम से प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की।

ग्रामीणों ने बताया कि इस डेम के निर्माण से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना शुरू हुआ था, जिससे उनकी खेती में सुधार हुआ था। लेकिन डेम टूटने के बाद अब फिर से जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे फसल उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो शासन की योजनाओं का लाभ जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।

जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराने के बाद ग्रामीणों को एक बार फिर आश्वासन तो मिला, लेकिन अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस बार प्रशासन वास्तव में कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी पहले की तरह लंबित ही रहेगा।

यह घटना प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर ग्रामीणों का विश्वास फिर से कायम कर पाता है।