दक्षिण बस्तर में PLGA बटालियन-1 का अंत! बड़े नक्सली कमांडर हेमला विज्जा समेत 24 नक्सली सरेंडर की तैयारी में
दंतेवाड़ा से बड़ी खबर सामने आई है, जहां PLGA बटालियन-1 के प्रमुख कमांडर हेमला विज्जा ने अपने 23 साथियों के साथ आत्मसमर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह दक्षिण बस्तर में नक्सल नेटवर्क के कमजोर होने का संकेत माना जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा/तेलंगाना l दंतेवाड़ा और दक्षिण बस्तर क्षेत्र से नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। लंबे समय से सक्रिय नक्सली संगठन PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) की बटालियन नंबर-1 अब समाप्ति की ओर बढ़ती नजर आ रही है। इस कड़ी में संगठन के बड़े कमांडर हेमला विज्जा उर्फ ऐथु (DVCM) ने अपने 23 साथियों के साथ आत्मसमर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, हेमला विज्जा साउथ बस्तर डिवीजन (SBD) में नक्सलियों के मिलिट्री विंग के प्रभारी थे और PL नंबर 09/10 से जुड़े हुए थे। वह हाल ही में तेलंगाना पहुंच चुके हैं, जहां उन्होंने तेलंगाना स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (TS SIB) के समक्ष सरेंडर के लिए संपर्क किया है। बताया जा रहा है कि उनके साथ कुल 24 नक्सली आत्मसमर्पण करने की प्रक्रिया में हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी तक आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि तेलंगाना पुलिस अगले 2 से 3 दिनों में इस संबंध में औपचारिक प्रेस रिलीज जारी कर सकती है।
गौरतलब है कि PLGA बटालियन नंबर-1 वर्ष 2004 से दक्षिण बस्तर क्षेत्र में सक्रिय रही है। पिछले दो दशकों में इस बटालियन ने कई बड़े हमलों को अंजाम दिया और सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया। इसे नक्सल संगठन की सबसे खतरनाक और प्रभावशाली इकाइयों में से एक माना जाता रहा है।
इससे पहले भी इसी बटालियन से जुड़े एक बड़े नक्सली नेता सोढ़ी केशा (SZCM), जो कंपनी नंबर-02 के प्रभारी थे, ने आत्मसमर्पण किया था। अब हेमला विज्जा जैसे शीर्ष कमांडर के सरेंडर से यह संकेत मिल रहा है कि बटालियन नंबर-1 का नेटवर्क लगभग खत्म हो चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम दक्षिण बस्तर में नक्सलवाद के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है। लगातार चल रहे सुरक्षा बलों के अभियान, विकास कार्यों और सरकार की पुनर्वास नीतियों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।
सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, बड़े कमांडरों के आत्मसमर्पण से नक्सल संगठन की रणनीतिक और ऑपरेशनल क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। इससे न केवल संगठन की गतिविधियां कमजोर होती हैं, बल्कि नए भर्ती होने वाले युवाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।
यदि यह आत्मसमर्पण आधिकारिक रूप से पुष्टि हो जाता है, तो यह छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियान के लिए एक बड़ी सफलता मानी जाएगी।
फिलहाल, सभी की नजर तेलंगाना पुलिस की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है, जो इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करेगी। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि दक्षिण बस्तर में नक्सल नेटवर्क किस हद तक कमजोर हुआ है और इसका क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है।