बलरामपुर में महिला आरक्षण पर कांग्रेस का हमला, भाजपा पर ‘परिसीमन एजेंडा’ का आरोप
बलरामपुर में कांग्रेस ने महिला आरक्षण को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। जिलाध्यक्ष हरिहर यादव ने कहा कि भाजपा आरक्षण की आड़ में परिसीमन का राजनीतिक एजेंडा लागू करना चाहती है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर जिले में महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि महिला आरक्षण के नाम पर देशभर में भ्रम फैलाया जा रहा है और इसके पीछे एक ‘गुप्त परिसीमन एजेंडा’ काम कर रहा है।
जिला मुख्यालय स्थित राजीव भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरिहर प्रसाद यादव ने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। उनका आरोप है कि पार्टी का असली मकसद महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि लोकसभा सीटों के गणित में बदलाव करना है।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही कानून बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा द्वारा 131वां संविधान संशोधन विधेयक लाना एक राजनीतिक चाल है। उनका कहना है कि इस कदम के जरिए भाजपा एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार करना चाहती है।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, इस प्रस्तावित बदलाव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर करीब 850 करने की योजना बनाई जा रही है, जिसमें राज्यों की 815 और केंद्र शासित प्रदेशों की 35 सीटें शामिल होंगी। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब 2026-27 में नई जनगणना प्रस्तावित है, तो 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने की कोशिश क्यों की जा रही है।
नेताओं ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण की शुरुआत कांग्रेस के शासनकाल में हुई थी। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1989 में पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने की पहल की थी। इसके बाद पी. वी. नरसिम्हा राव की सरकार ने इसे कानूनी रूप दिया और डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा से पारित हुआ।
कांग्रेस का दावा है कि यदि भाजपा की मंशा साफ होती, तो मौजूदा लोकसभा और विधानसभा सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जा सकता था। लेकिन इसके बजाय सरकार इसे परिसीमन से जोड़कर देरी कर रही है।
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पार्टी इस मुद्दे को जनहित से जोड़कर देख रही है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए सड़कों से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।
इस बयान के बाद जिले में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र बन गया है, जहां सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है।