शिकायतकर्ता जगत कुमार गुप्ता के अनुसार उन्होंने रायपुर की GDA Solar Private Limited कंपनी के माध्यम से अपने घर की छत पर 10 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया था। योजना के अनुसार इस क्षमता के सोलर सिस्टम से घरेलू उपयोग की बिजली पूरी हो जानी चाहिए थी और कई मामलों में अतिरिक्त बिजली उत्पादन पर उपभोक्ताओं को सब्सिडी भी मिलती है।
लेकिन सोलर पैनल लगने के बाद भी उन्हें करीब 21 हजार रुपये का बिजली बिल थमा दिया गया। इतना ही नहीं, बिजली विभाग ने बिल की वसूली के लिए लोक अदालत का नोटिस भी जारी कर दिया, जिससे उपभोक्ता की परेशानी और बढ़ गई है।
इंस्टॉलेशन में गड़बड़ी का आरोप
जगत कुमार गुप्ता का आरोप है कि सोलर कंपनी ने सिस्टम तो लगा दिया, लेकिन उसका सही तरीके से इंस्टॉलेशन, ग्रिड कनेक्शन और नेट मीटरिंग का समुचित समन्वय नहीं किया।
उन्होंने बताया कि 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम सामान्य घरेलू खपत से लगभग दोगुनी बिजली उत्पादन करने की क्षमता रखता है। ऐसे में नेट मीटरिंग की प्रक्रिया पूरी होने पर बिजली बिल शून्य या नेगेटिव होना चाहिए था।
लेकिन तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण उन्हें लगातार बिजली का बिल मिल रहा है और अब 21 हजार रुपये का भुगतान करने की स्थिति बन गई है।
शिकायत के बाद भी नहीं मिली सुनवाई
पीड़ित उपभोक्ता का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार कंपनी से संपर्क किया और शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया।
अब बिजली विभाग से लोक अदालत का नोटिस मिलने के बाद उनकी चिंता और बढ़ गई है। उन्होंने इस मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर जांच कराने की मांग की है।
जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने कंपनी पर पीएम सूर्यघर योजना के नाम पर धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि सोलर सिस्टम की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि गड़बड़ी सामने आती है तो कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
इस मामले में Abhishek Sharma, वरिष्ठ अभियंता, विद्युत विभाग Komakhan ने बताया कि शिकायत मिलने पर विभागीय स्तर पर मामले की जांच की जाएगी और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला सामने आने के बाद पीएम सूर्यघर योजना के तहत लगाए जा रहे सोलर सिस्टम की गुणवत्ता और क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।