निरीक्षण के दौरान कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, एसडीएम नूतन कंवर, मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.के. श्रीमाली सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। संभाग आयुक्त ने जिला चिकित्सालय के ओपीडी, सामान्य रोगी कक्ष, नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग, आपातकालीन कक्ष तथा पुरुष एवं महिला मेडिकल वार्ड का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की।
संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर ने ईएनटी विभाग के ओपीडी कक्ष में पहुंचकर वहां मौजूद चिकित्सकों से मरीजों की जांच के लिए उपलब्ध उपकरणों और संसाधनों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि मरीजों की जांच और उपचार के लिए सभी आवश्यक उपकरण अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहें, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
निरीक्षण के दौरान एस.एन. राठौर पुरुष मेडिकल वार्ड में भी पहुंचे, जहां उन्होंने वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने मरीज निर्मल से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अस्पताल में मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। मरीजों से बातचीत के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि मरीजों को बेहतर उपचार के साथ-साथ संवेदनशील और आत्मीय व्यवहार भी मिलना चाहिए।
संभाग आयुक्त ने चिकित्सकों और अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को समय पर उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
निरीक्षण के दौरान एस.एन. राठौर ने जिला चिकित्सालय परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए प्रतीक्षालय और कैंटीन निर्माण की आवश्यकता भी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि अस्पताल आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
संभाग आयुक्त ने अस्पताल प्रशासन को साफ-सफाई, दवा उपलब्धता और मरीजों की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि जिला चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस आकस्मिक निरीक्षण के माध्यम से अस्पताल की व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया और अधिकारियों को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इस तरह के निरीक्षण से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर उपचार सुविधा मिल सकेगी।