हिंसा नहीं, विकास बनेगा सुकमा की नई पहचान: अतिसंवेदनशील जगरगुंडा पहुंचे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा
सुकमा जिले के अतिसंवेदनशील ग्राम जगरगुंडा में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने समाज प्रमुखों और ग्रामीणों से संवाद कर स्पष्ट किया कि अब सुकमा की पहचान हिंसा नहीं बल्कि विकास होगी। नियद नेल्ला नार योजना, पुनर्वास नीति, वनोपज मूल्यवर्धन और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से शासन विकास की मुख्यधारा को गांव-गांव तक पहुंचा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव | रायपुर/सुकमा। बस्तर अंचल के अतिसंवेदनशील इलाकों में विकास की नई रोशनी पहुंचाने के उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा सुकमा जिले के जगरगुंडा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक समाज प्रमुखों—गायता, सिरहा, पुजारी, बैगा—एवं जनप्रतिनिधियों के साथ आत्मीय संवाद किया। बैठक में समाज प्रमुखों ने बताया कि लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण गांवों तक विकास नहीं पहुंच पाया और कई योजनाएं अधूरी रह गईं, जिससे आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
इस पर उपमुख्यमंत्री शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब सुकमा की पहचान हिंसा नहीं, बल्कि विकास होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्ला नार योजना के तहत सुरक्षा कैंप केवल नक्सलवाद पर नियंत्रण का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए सरकारी योजनाओं को पहुंचाने वाले सुविधा केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं। जिन गांवों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं, वहां अब तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जो ग्राम पंचायतें अपने भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाकर स्वयं को ‘नक्सल हिंसा मुक्त’ घोषित करेंगी, उन्हें इलवद पंचायत योजना के तहत 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विकास राशि दी जाएगी। साथ ही जनपद सदस्य को 10 लाख और जिला पंचायत सदस्य को 15 लाख रुपये विकास कार्यों के लिए प्रदान किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बस्तर के वनोपज अब केवल संग्रहण तक सीमित नहीं रहेंगे। ग्रामीण अब गांवों में ही प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर व्यवसायी बनेंगे, जिससे वनोपज का मूल्य चार से पांच गुना तक बढ़ेगा और ग्रामीणों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने 50 किसानों को टमाटर और बैंगन के उन्नत पौधे, मूंग-उड़द के बीज, 17 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड तथा स्व-सहायता समूहों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत आर्थिक सहायता वितरित की। मिशन दृष्टि के तहत 40 मोतियाबिंद मरीजों को विशेष बस से उपचार हेतु जिला अस्पताल रवाना किया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पीएचसी बुरड़ी, गगनपल्ली और किस्टाराम को एनक्यूएएस प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण उपस्थित रहे।