थाना प्रभारी ने दिखाई मानवता, प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को पहुंचाया अस्पताल, जच्चा-बच्चा सुरक्षित

गरियाबंद जिले के इंदागांव थाना प्रभारी जितेंद्र विजयवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को अपने निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया। समय पर उपचार मिलने से जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।

Jun 14, 2026 - 12:04
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थाना प्रभारी ने दिखाई मानवता, प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को पहुंचाया अस्पताल, जच्चा-बच्चा सुरक्षित

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l पुलिस की संवेदनशीलता और मानवता का एक प्रेरणादायक उदाहरण गरियाबंद जिले में देखने को मिला, जहां इंदागांव थाना प्रभारी जितेंद्र विजयवार ने समय रहते एक गर्भवती महिला की मदद कर उसकी और नवजात की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, नेशनल हाईवे-130 सी के किनारे एक महिला प्रसव पीड़ा से गंभीर रूप से परेशान हालत में मिली। महिला दर्द से कराह रही थी और तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी। घटना की सूचना मिलते ही इंदागांव थाना प्रभारी जितेंद्र विजयवार मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

महिला की हालत गंभीर देखते हुए उन्होंने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय तत्काल निर्णय लिया और अपने निजी वाहन से महिला को अस्पताल पहुंचाया। उनकी तत्परता और संवेदनशीलता के कारण महिला को समय पर उपचार मिल सका। अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव कराया गया, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी था। यदि उपचार में थोड़ी भी देरी होती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। समय रहते मिली मदद ने संभावित जोखिम को टाल दिया और सुरक्षित प्रसव संभव हो सका।

घटना के बाद महिला के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने थाना प्रभारी जितेंद्र विजयवार के इस मानवीय कदम की प्रशंसा की। लोगों का कहना है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने का ही काम नहीं करती, बल्कि जरूरत पड़ने पर मानव सेवा में भी अग्रणी भूमिका निभाती है। इस घटना ने पुलिस के प्रति लोगों के विश्वास को और मजबूत किया है।

थाना प्रभारी जितेंद्र विजयवार ने कहा कि लोगों की सहायता करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि उस समय सबसे महत्वपूर्ण बात महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा थी। इसलिए बिना समय गंवाए उन्हें अस्पताल पहुंचाना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि इंसानियत और कर्तव्य दोनों की मांग यही थी कि तत्काल मदद की जाए।

यह घटना पुलिस और समाज के बीच सकारात्मक संबंधों का भी उदाहरण बनकर सामने आई है। अक्सर पुलिस की भूमिका कानून व्यवस्था तक सीमित समझी जाती है, लेकिन ऐसे कार्य यह साबित करते हैं कि पुलिस समाज के हर वर्ग की सहायता और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अधिकारियों को सम्मानित किया जाना चाहिए, जो अपने कर्तव्यों से आगे बढ़कर मानवता की सेवा का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इंदागांव थाना प्रभारी की इस पहल ने यह संदेश दिया है कि संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय कई बार किसी की जिंदगी बचाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

गरियाबंद जिले की यह घटना पुलिस सेवा के मानवीय पक्ष को उजागर करती है और समाज में सकारात्मक प्रेरणा देने वाली मिसाल के रूप में देखी जा रही है।