पेशाब में रक्त को कभी नजरअंदाज न करें: किडनी कैंसर का हो सकता है प्रारंभिक संकेत

पेशाब में रक्त (हेमट्यूरिया) को अक्सर लोग मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह किडनी कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बिना दर्द के भी यदि पेशाब में रक्त दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है, ताकि समय रहते सही इलाज संभव हो सके।

Jun 17, 2026 - 16:26
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पेशाब में रक्त को कभी नजरअंदाज न करें: किडनी कैंसर का हो सकता है प्रारंभिक संकेत

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l पेशाब में रक्त आना, जिसे चिकित्सकीय भाषा में हेमट्यूरिया कहा जाता है, एक ऐसा लक्षण है जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अक्सर लोग इसे अस्थायी संक्रमण, पानी की कमी या सामान्य जलन मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर तब जब इसमें दर्द नहीं होता। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार बिना दर्द के दिखाई देने वाला रक्त कई बार किडनी कैंसर या मूत्र मार्ग से जुड़ी गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है।

सीनियर कंसल्टेंट, क्लिनिकल लीड, नेफ्रोलॉजी के अनुसार किडनी कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। ऐसे में पेशाब में रक्त का अचानक दिखना ही पहला चेतावनी संकेत हो सकता है। यह रक्त कभी गुलाबी, कभी लाल और कई बार कोला जैसे गहरे रंग के रूप में दिखाई दे सकता है। कई मामलों में यह समस्या रुक-रुककर आती है, जिससे मरीज इसे गंभीरता से नहीं लेते।

पेशाब में संक्रमण या किडनी की पथरी में आमतौर पर जलन, दर्द या तेज असहजता होती है, लेकिन किडनी कैंसर में केवल रक्त दिखाई दे सकता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, वैसे-वैसे अन्य लक्षण जैसे पीठ के एक तरफ लगातार दर्द, अचानक वजन घटना, थकान और पेट में गांठ महसूस होना सामने आ सकते हैं।

दुर्भाग्य से, अधिकतर मरीज बिना दर्द वाले लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते और डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देते हैं। कई लोग सोचते हैं कि समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी, या घरेलू उपचार और बिना सलाह की दवाओं पर निर्भर हो जाते हैं। यही देरी बीमारी को आगे बढ़ने का मौका देती है, जिससे इलाज जटिल हो सकता है।

आधुनिक चिकित्सा तकनीकों ने अब किडनी कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाना संभव बना दिया है। पेशाब की जांच, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसे परीक्षणों से किडनी और मूत्र मार्ग की असामान्यताओं की पहचान की जा सकती है। शुरुआती जांच से ट्यूमर को समय रहते पकड़ा जा सकता है, जिससे इलाज अधिक प्रभावी हो जाता है।

आज के समय में रोबोटिक सर्जरी, मिनिमल इनवेसिव प्रक्रियाएं, लक्षित थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी तकनीकों ने किडनी कैंसर के इलाज के परिणामों में काफी सुधार किया है। यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में लग जाए तो कई मामलों में किडनी को सुरक्षित रखते हुए भी इलाज संभव हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पेशाब में रक्त का एक भी मामला नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, चाहे वह बिना दर्द के ही क्यों न हो। यह हमेशा गंभीर बीमारी नहीं होती, लेकिन इसकी जांच करवाना बेहद जरूरी है ताकि सही कारण का पता लगाया जा सके।

जागरूकता और समय पर चिकित्सा परामर्श ही किडनी स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है। पेशाब में रक्त को एक चेतावनी संकेत मानकर तुरंत जांच कराना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।