गुंडरदेही-धमतरी मार्ग पर चक्काजाम, खलारी गांव के ग्रामीण दो मांगों को लेकर डटे रहे

गुंडरदेही-धमतरी मार्ग पर ग्राम खलारी के ग्रामीणों ने दो सूत्रीय मांगों को लेकर चक्काजाम कर दिया। भारी संख्या में लोग सड़क पर बैठ गए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। प्रशासन के समझाइश के बावजूद ग्रामीण अपने निर्णय पर अड़े रहे।

Jun 17, 2026 - 16:07
Jun 17, 2026 - 16:09
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गुंडरदेही-धमतरी मार्ग पर चक्काजाम, खलारी गांव के ग्रामीण दो मांगों को लेकर डटे रहे

UNITED NEWS OF ASIA, लीलाधर साहू, धमतरी l गुंडरदेही-धमतरी मार्ग पर सोमवार सुबह उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब ग्राम खलारी के सैकड़ों ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। ग्रामीण अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर सड़क पर धरने पर बैठ गए, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। तहसीलदार ने ग्रामीणों को समझाने और जाम समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन कई घंटों की बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन पाई। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

ग्रामीणों की पहली मांग आबादी पट्टा विवाद से जुड़ी है। उनका आरोप है कि ग्रामसभा के विरोध के बावजूद एक बाहरी महिला रेखा सागर को आबादी पट्टा जारी कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि 31 अगस्त 2024 को हुई ग्रामसभा में इस प्रस्ताव का स्पष्ट रूप से विरोध किया गया था। इसके बावजूद पूर्व सरपंच, सचिव और कोटवार पर आरोप है कि उन्होंने प्रक्रिया में अनियमितता करते हुए नाम जोड़ने की कार्रवाई की।

ग्रामीणों ने आगे बताया कि 19 अक्टूबर 2024 को निर्माण कार्य शुरू होने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद 21 अक्टूबर 2024 और 18 सितंबर 2024 की ग्रामसभा में पट्टा निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर संबंधित अधिकारियों को भेजा गया। मामले की जांच के बाद एसडीएम और दुर्ग संभाग के आयुक्त द्वारा निर्माण पर रोक भी लगाई गई थी। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि 3 जून 2026 को एसडीएम ने अगली सुनवाई से पहले ही एकतरफा आदेश जारी कर रोक हटा दी, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई।

दूसरी मांग कोटवार की सेवा भूमि से संबंधित है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान कोटवार टीकाराम का नाम ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज होने के बावजूद पूर्व कोटवार, जिन्हें पदमुक्त किया जा चुका है, अभी भी भूमि पर कब्जा बनाए हुए हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और रिकॉर्ड दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित कोटवार को न तो भूमि का कब्जा मिल रहा है और न ही ऋण एवं खाद जैसी सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल पा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक आबादी पट्टा निरस्त नहीं किया जाता और कोटवार भूमि विवाद का समाधान नहीं होता, तब तक चक्काजाम जारी रहेगा। लगातार आंदोलन के कारण मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा और प्रशासनिक स्तर पर स्थिति सामान्य करने के प्रयास जारी रहे।