लोकार्पण के तीन महीने बाद ही उखड़ने लगीं टाइल्स, नेपानगर नगर पालिका भवन निर्माण पर उठे सवाल
नेपानगर नगर पालिका परिषद के नए भवन का लोकार्पण मार्च 2026 में हुआ था, लेकिन भवन शुरू होने से पहले ही टाइल्स उखड़ने और टूटने लगी हैं। निर्माण गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. महेश किनगे, नेपानगर l नेपानगर नगर पालिका परिषद के नए कार्यालय भवन के निर्माण कार्य को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। लगभग 1 करोड़ 96 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस भवन का लोकार्पण 15 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया गया था। हालांकि लोकार्पण के कई महीने बाद भी भवन में नगर पालिका कार्यालय का संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसी बीच भवन की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, भवन की फर्श पर लगाई गई टाइल्स कई स्थानों पर उखड़ने और टूटने लगी हैं। इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर टाइल्स के बीच गैप भी दिखाई देने लगा है। भवन अभी पूरी तरह उपयोग में भी नहीं आया है, इसके बावजूद निर्माण कार्य में खामियों के संकेत मिलने लगे हैं। इससे निर्माण की गुणवत्ता और कार्य की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन के शुरू होने से पहले ही इस प्रकार की समस्याएं सामने आना चिंता का विषय है। उनका मानना है कि यदि अभी से निर्माण सामग्री खराब होने लगी है तो भविष्य में भवन की स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराए जाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मामले को लेकर नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता की उचित निगरानी नहीं की गई, जिसके कारण भवन में शुरुआती स्तर पर ही खामियां दिखाई देने लगी हैं। हालांकि इस संबंध में नगर पालिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर, निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार ने फोन पर चर्चा के दौरान बताया कि भवन का कुछ कार्य अभी शेष है। उन्होंने कहा कि जहां भी टाइल्स टूटी हैं या किसी प्रकार की तकनीकी समस्या है, उसे सुधार दिया जाएगा। ठेकेदार का दावा है कि निर्माण कार्य पूरी तरह पूर्ण होने के बाद सभी कमियों को दूर कर लिया जाएगा।
फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर पालिका भवन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक निर्माण में सामने आई इन खामियों ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक धन से बनने वाले भवनों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। नगरवासियों को उम्मीद है कि भवन की सभी तकनीकी कमियों को जल्द दूर कर इसे सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।