नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सियासत तेज, कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया श्रेय लेने का आरोप
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा पर झूठा श्रेय लेने और राजनीतिक मजबूरी में महिला आरक्षण बिल लाने का आरोप लगाया है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ में भी राजनीतिक माहौल गरमा गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा पर इस अधिनियम का श्रेय लेने की होड़ में जुटने का आरोप लगाया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि महिलाओं को विधानमंडलों में आरक्षण दिलाने की पहल कांग्रेस की समतावादी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भाजपा की विचारधारा ऐतिहासिक रूप से महिला आरक्षण के खिलाफ रही है, जबकि कांग्रेस ने हमेशा से महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रयास किए हैं।
शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और नेता राहुल गांधी लगातार महिला आरक्षण के समर्थन में रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था, जिसे 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आज राजनीतिक मजबूरी के चलते महिला आरक्षण का समर्थन कर रही है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की नीतियों के कारण बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ी है। इसी नाराजगी को कम करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी हमेशा से महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की पक्षधर रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने 1989 में पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रस्ताव रखा था। बाद में 1993 में पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार ने इसे लागू कर देशभर में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की।
शुक्ला ने कहा कि आज देश में पंचायत और नगर निकायों में 15 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि सक्रिय हैं, जो कांग्रेस की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष में रहते हुए महिला आरक्षण विधेयक को पारित करने में बाधा डालती रही है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में महिला आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक लाभ के लिए उठाया जा रहा है, जबकि कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय और समानता के दृष्टिकोण से देखती है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रहेगी और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दिखावे का विरोध करेगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर जारी यह राजनीतिक बयानबाजी आने वाले समय में और तेज हो सकती है, क्योंकि यह मुद्दा सीधे तौर पर महिलाओं के अधिकारों और प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ है।