बैठक में जिले में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिन कार्यों को अभी तक पूरा नहीं किया गया है, उनका तकनीकी अधिकारियों द्वारा स्थल पर भौतिक सत्यापन किया जाए और उन्हें प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधूरे कार्य न केवल संसाधनों की बर्बादी हैं, बल्कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधा बनते हैं।
कलेक्टर ने विशेष रूप से वृक्षारोपण, नहर निर्माण एवं मरम्मत, गाद निकासी और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की समस्या को भी कम किया जा सकेगा।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि सभी निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और लंबित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। कलेक्टर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यों के प्रति लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित के खिलाफ वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत भी निर्देश दिए गए कि 90 दिवस का रोजगार पूर्ण करते हुए आवास निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाए। इससे ग्रामीणों को रोजगार मिलने के साथ-साथ उन्हें पक्का आवास भी उपलब्ध हो सकेगा।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि मनरेगा के अंतर्गत रोजगारमूलक कार्यों को मांग के आधार पर प्राथमिकता दी जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। इसके अलावा, ग्राम पंचायतों में “नवा तरिया”, अमृत सरोवर और अन्य जल संरक्षण कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एनआरईजीएसॉफ्ट पोर्टल में दर्ज अधूरे और लंबित कार्यों को लेकर भी गंभीरता व्यक्त की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि ग्राम सभा के माध्यम से इन कार्यों का सत्यापन किया जाए और उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा या तर्कसंगत रूप से समाप्त किया जाए।
इसके लिए विशेष अभियान चलाने की भी बात कही गई, ताकि लंबित कार्यों का शीघ्र निपटारा किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि नए कार्य शुरू करने से पहले वर्तमान में चल रहे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए।
यह बैठक ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, जिससे न केवल रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।