जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की बोर्ड परीक्षाएं 16 मार्च 2026 से शुरू होने वाली हैं। इन परीक्षाओं के सुचारु और पारदर्शी संचालन के लिए राज्य ओपन स्कूल, रायपुर द्वारा पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। आदेश क्रमांक 1426/परीक्षा/गोपनीय/2026, दिनांक 18 फरवरी 2026 में यह स्पष्ट कहा गया था कि जिस स्कूल में परीक्षा केंद्र बनाया गया है, वहां के प्राचार्य या व्याख्याता को केंद्राध्यक्ष नियुक्त नहीं किया जाएगा।
राज्य ओपन स्कूल का उद्देश्य यह था कि स्थानीय प्रभाव, पक्षपात या संभावित मिलीभगत की आशंका को समाप्त किया जा सके। इसके लिए यह अनिवार्य किया गया था कि परीक्षा केंद्र का प्रभारी किसी अन्य संस्था के प्राचार्य या व्याख्याता को बनाया जाए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रह सके।
हालांकि आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी MCB द्वारा जारी आदेश क्रमांक 5167, दिनांक 6 मार्च 2026 में इन निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लालपुर में उसी संस्था की प्राचार्य सुदिप्ता शर्मा को ही केंद्राध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। इसी प्रकार गोदरीपारा परीक्षा केंद्र में भी स्थानीय संस्था से जुड़े व्यक्ति भरत जायसवाल को केंद्राध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि परीक्षा केंद्र का संचालन उसी संस्था के प्रमुख या शिक्षक द्वारा किया जाएगा, तो निष्पक्षता प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि राज्य ओपन स्कूल ने बाहरी संस्था के प्राचार्यों या शिक्षकों को ही केंद्राध्यक्ष बनाने के निर्देश दिए थे।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। कई शिक्षाविदों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि नियमों की जानबूझकर अनदेखी कर कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश हो सकती है।
चूंकि परीक्षाएं शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है, ऐसे में इस मुद्दे को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों के विपरीत हुई नियुक्तियों को समय रहते निरस्त नहीं किया गया, तो परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
मांग की जा रही है कि राज्य ओपन स्कूल के निर्देशों का पालन करते हुए परीक्षा केंद्रों में बाहरी केंद्राध्यक्षों की नियुक्ति की जाए, ताकि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बना रहे और परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हो सकें।