‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान को मिली नई रफ्तार, एमसीबी में 52 एकड़ में विकसित होगा जल संरक्षण मॉडल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। एमसीबी जिले के बरदर गांव में 52 एकड़ क्षेत्र में समेकित जल संरक्षण एवं हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है, जिससे लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित होगी।

Jul 12, 2026 - 15:21
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‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान को मिली नई रफ्तार, एमसीबी में 52 एकड़ में विकसित होगा जल संरक्षण मॉडल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और हरित विकास को नई गति मिल रही है। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) के अंतर्गत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान को प्रदेशभर में जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

इसी क्रम में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के जनपद पंचायत खड़गवां अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में जन सम्मेलन, ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृहद वृक्षारोपण अभियान और ‘मोर गांव-मोर पानी’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री एवं मनेन्द्रगढ़ विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की। उन्होंने स्वयं कंटूर ट्रेंच की खुदाई कर जल संरक्षण का संदेश दिया और ग्रामीणों से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि यदि समाज मिलकर जल और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करेगा, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

ग्राम पंचायत बरदर में 52 एकड़ क्षेत्र में समेकित जल संरक्षण एवं हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है। इसमें 30 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर वर्षाजल संग्रहण एवं भू-जल संवर्धन की व्यवस्था की जा रही है। वहीं 22 एकड़ भूमि पर लगभग दो हजार फलदार और अन्य पौधों का रोपण शुरू किया गया है। यह मॉडल भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का उदाहरण बनेगा।

अभियान के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों से क्षेत्र में लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित होने का अनुमान है। इससे सिंचाई सुविधाओं में विस्तार, पेयजल उपलब्धता में सुधार, कृषि उत्पादकता में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। साथ ही ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

राज्य सरकार द्वारा VB-G RAM-G योजना के तहत सभी जिलों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना विकास और आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य जनभागीदारी के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल-सुरक्षित, हरित और आत्मनिर्भर बनाना है। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण विकास को भी नई दिशा दे रहा है।