महासमुंद में प्राकृतिक खेती कार्यशाला, प्रभारी मंत्री, सांसद और विधायक ने किसानों को दिया जागरूकता संदेश
महासमुंद जिले के बागबाहरा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री, सांसद और विधायक ने किसानों को पारंपरिक एवं रसायन मुक्त खेती अपनाने का संदेश दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l महासमुंद जिले के बागबाहरा स्थित कृषि उपज मंडी प्रांगण में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय ‘प्राकृतिक खेती प्रोत्साहन कार्यशाला’ का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला किसान मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा छत्तीसगढ़ की परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार दीप प्रज्वलन और पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी तथा बसना विधायक संपत अग्रवाल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती को अपनाना न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे कृषि लागत में भी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को इस दिशा में हर संभव तकनीकी एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
विधायक संपत अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती आज के समय की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि रसायन आधारित खेती के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, जिसका सीधा संबंध हमारे भोजन में मौजूद अवशेषों से है। उन्होंने किसानों को गौ आधारित कृषि पद्धतियों जैसे जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत को अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि कम जल संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि इस पद्धति को अपनाने वाले किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान जीवामृत, बीजामृत एवं घनजीवामृत तैयार करने की विधि का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिससे किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों को समझने में आसानी हुई।
विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह टिकाऊ कृषि प्रणाली का आधार भी है। इसके माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और लंबे समय तक उत्पादन क्षमता बनी रहती है।
कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर पुनः प्रेरित करना और उन्हें रसायन मुक्त खेती के लाभों से अवगत कराना रहा, ताकि आने वाले समय में कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके।